छत्तीसगढ़

मनरेगा से बदली किसान हर प्रसाद जाय सवाल की किस्मत डबरी निर्माण बना आजीविका वृद्धि का आधार

मुंगेली, 22 नवंबर 2025/sns/- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) न केवल ग्रामीणों को रोजगार देने का माध्यम है, बल्कि आजीविका सुधार और स्थायी विकास का सशक्त उपकरण भी साबित हो रही है। इसी का जीवंत उदाहरण है विकासखंड मुंगेली अंतर्गत ग्राम पंचायत पदमपुर के किसान श्री हरप्रसाद जायसवाल, जिनकी जिंदगी मनरेगा के तहत स्वीकृत डबरी निर्माण कार्य ने पूरी तरह बदल दी है। वर्षों से हरप्रसाद के खेतों में सिंचाई की कमी सबसे बड़ी चुनौती रही। खेती पूरी तरह वर्षा आधारित होने के कारण फसल उत्पादन नियमित रूप से प्रभावित होता था। गर्मी के दिनों में खेत सूख जाते, जिससे परिवार की आय सीमित रहती और पशुपालन या मछलीपालन जैसे अतिरिक्त आय के साधन विकसित करना संभव नहीं हो पाता था।
ग्राम पंचायत पदमपुर के ग्रामीण आजीविका सुधार के प्रयासों के तहत हरप्रसाद जायसवाल की निजी भूमि पर डबरी निर्माण का प्रस्ताव मनरेगा योजना में भेजा गया। स्थल निरीक्षण और तकनीकी स्वीकृति के बाद दिशा-निर्देशों अनुसार कार्य स्वीकृत किया गया। ग्राम पंचायत ने तकनीकी टीम के सहयोग से निर्माण कार्य समय पर गुणवत्तापूर्वक पूर्ण कराया। निर्माण पूर्ण होते ही खेत में वर्षा जल संग्रहण हेतु एक सुदृढ़, गहरी और सुव्यवस्थित डबरी उपलब्ध हो गई, जिससे किसान की तकदीर ही बदल दी।
डबरी निर्माण के बाद हरप्रसाद अब पूरे वर्ष अपने खेतों की सिंचाई कर पा रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप वे दोहरी फसल लेकर अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। इससे न केवल फसल की गुणवत्ता सुधरी है, बल्कि परिवार की आय भी दोगुनी हो गई है। डबरी के उपयोग से हरप्रसाद ने अपनी निजी पूंजी से मछलीपालन शुरू किया, जिससे उन्हें प्रति वर्ष लगभग 1.5 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हो रहा है। इसके अतिरिक्त डबरी की मेड़ों पर सब्जियां, अरहर और अन्य मुनाफ़ेदार फसलें उगाकर भी अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। डबरी के आसपास हरियाली बढ़ने से पशुओं के लिए हरा चारा भी सहज उपलब्ध हो रहा है।
कलेक्टर श्री कुंदन कुमार ने बताया कि हरप्रसाद जायसवाल ने अपनी इच्छा शक्ति और मेहनत से डबरी निर्माण कार्य को आजीविका वृद्धि का बेहतरीन उदाहरण बना दिया है। उन्होंने कहा कि यह सफलता स्पष्ट करती है कि मनरेगा की संरचनाएँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में कितनी प्रभावी हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत ग्रामीण न केवल स्थायी संपत्ति प्राप्त करते हैं, बल्कि निर्माण कार्यों में भाग लेकर रोजगार और मजदूरी भी अर्जित कर सकते हैं।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रभाकर पाण्डेय ने बताया कि कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिले में मनरेगा के तहत पात्र परिवारों को प्राथमिकता देकर हितग्राही मूलक कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं। इनमें डबरी, पशु शेड, बकरी शेड, मुर्गी शेड, सूअर शेड, कुआँ आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन कार्यों से ग्रामीण परिवारों की आजीविका में निरंतर सुधार हो रहा है और वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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