छत्तीसगढ़

आज से खिलाई जाएगी 13 लाख से अधिक लोगों को फ़ाइलेरिया की दवा

बलौदाबाजार, 9 फ़रवरी 2026/sns/- फाइलेरिया रोग के रोकथाम हेतु सामूहिक दवा सेवन गतिविधि की शुरुआत 10 फरवरी से जिले में भी आरंभ हो रही है । इस हेतु टीम गठन,बूथ का चिन्हांकन, प्रशिक्षण ,दवाई की व्यवस्था जैसी जरूरी तैयारी पूर्ण कर ली गई हैं। जिला कलेक्टर दीपक सोनी ने इस अभियान के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन हेतु जिले के अन्य प्रमुख विभागों जैसे पंचायत, राजस्व, महिला बाल विकास ,शिक्षा विभाग को भी समन्वय बना कर कार्य करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर द्वारा अभियान की कड़ाई से निगरानी की भी बात कही गई है। अभियान में लापरवाही होने पर कार्यवाही भी की जाएगी।

अभियान के सम्बंध में जानकारी देते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ राजेश अवस्थी ने बताया कि जिला बलौदा बाज़ार -भाटापारा में आई डी ए (आईवरमेकटीन ,डी ई सी ,एल्बेंडाजोल ) दी जाएगी । 10 फरवरी से 25 फरवरी तक ज़ारी रहने वाले इस सामूहिक दवा सेवन गतिविधि में आरंभ के तीन दिन बूथ वार दवाई का सेवन कराया जाएगा। दवाई डॉट्स पद्धति अर्थात स्वास्थ्य कार्यकर्ता के समक्ष ही खाई जानी है। इस दौरान फाइलेरिया रोग से बचाव और दवा से होने वाले लाभ को भी समुदाय में प्रसारित करना है । 13 से 22 फरवरी तक स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर दवाई सेवन कराएगी जबकि 23 से 25 फरवरी के बीच मॉप अप राउंड में छूटे हुए लोगों तक पहुँचने का प्रयास किया जायेगा। कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु हर स्तर की तैयारी पूर्ण हो चुकी है।

वेक्टर बोर्न रोग नियंत्रण कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डॉ पकंज वर्मा के अनुसार फाइलेरिया जिसे आम बोल चाल में हाथीपांव का वर्ष 2027 तक उन्मूलन किया जाना है । इस हेतु की जा रही सामूहिक दवा सेवन गतिविधि अंतर्गत कुल 13 लाख 11 हज़ार 5 सौ 80 लोगों को दवाई खिलाने का लक्ष्य रखा गया है जिसके लिए 2 हज़ार 1 सौ 88 बूथ पर 4 हज़ार 3 सौ 76 लोग ड्यूटी करेंगे। यह अभियान जिले के 805 ग्रामों में संपादित किया जाएगा। कार्यक्रम की निगरानी हेतु हर पांच बूथ पर एक सुपरवाइजर और हर 10 सुपरवाइजर के ऊपर एक सेक्टर सुपरवाइजर को जिम्मेदारी दी गई है । किसी प्रकार की आकस्मिक स्थिति से निपटने हेतु 30 रैपिड रेस्पॉन्स टीम भी बनाई गई है। दो वर्ष से कम, गर्भवती महिला एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित को दवाई का सेवन नहीं करना है। 1 से 2 वर्ष के बच्चों को केवल एल्बेंडाजोल की आधी गोली का सेवन कराना है ।

फाइलेरिया अथवा हाथीपांव संक्रमित क्यूलेक्स मच्छर के काटने से शरीर मे कृमि के प्रवेश से होता है बीमारी लंबे समय के बाद अपना लक्षण प्रकट करना शुरू करती है। हाथीपाँव होने की स्थिति में उसका उपचार सम्भव नहीं है जिस कारण बचाव हेतु पूर्व से ही दवाई का सेवन कर लिया जाना चाहिए । फाइलेरिया का एक प्रकार अंडकोष की सूजन भी है जिसे हाइड्रोसिल भी कहा जाता है इसे सर्जरी से ठीक किया जा सकता है। वार्षिक फाइलेरिया रिपोर्ट 2025 अनुसार जिले में 154 हाथीपांव और 50 हाइड्रोसिल के मरीज है।

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