छत्तीसगढ़

लू-तापघात से बचाव हेतु जिला प्रशासन सतर्क

कवर्धा, 01 अप्रैल 2026/sns/-छत्तीसगढ़ शासन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा लू-तापघात (हीट वेव) से बचाव एवं प्रबंधन के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने समस्त विभागों को जिला, तहसील एवं ग्राम स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जारी आदेश के अनुसार वैश्विक तापमान में औसत वृद्धि एवं जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के चलते विगत वर्षों में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में अप्रैल से जून माह के दौरान भीषण गर्मी एवं लू की प्रवृत्ति में वृद्धि देखी गई है। इस वर्ष भी तापमान में वृद्धि एवं भीषण गर्मी पड़ने की संभावना व्यक्त की गई है। इसके परिणामस्वरूप पशुओं के समक्ष पेयजल संकट उत्पन्न होने की आशंका है। ऐसी स्थिति में पशुपालकों को स्थानीय ग्राम पंचायत के सरपंच से संपर्क कर जल समस्या से अवगत कराने तथा स्थानीय स्तर पर पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक सुझाव देने के लिए कहा गया है।
संस्था स्तर पर लू से बचाव के लिए “क्या करें एवं क्या न करें” के संबंध में ग्राम सभाओं के माध्यम से पशुपालकों को जागरूक किया जाएगा। साथ ही अधीनस्थ अमले को निर्देशित किया गया है कि वे पशुपालकों को समय-समय पर आवश्यक सलाह दें तथा जरूरत पड़ने पर इन उपायों का पालन भी सुनिश्चित कराएं। जिले में चल चिकित्सा अधिकारियों की निगरानी में जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जहां आपात स्थिति में मोबाईल नंबर 8103187138 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, विकासखण्ड स्तर पर भी नियंत्रण कक्ष स्थापित कर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जो अपने-अपने क्षेत्र में लू-तापघात से संबंधित व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे।
जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष के लिए डॉ. उपेन्द्र वशिष्ट डहरे मोबाई नंबर 8103187138 को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। विकासखण्ड कवर्धा के लिए डॉ. प्रशांत सागर शर्मा मोबाईल-8319468957, बोड़ला डॉ. रोशनी हिरवानी मोबाईल-9340321596, सहसपुर लोहारा डॉ. अशोक बाचकर मोबाईल-9755927908 और पंडरिया के लिए डॉ. मंजू चेलकर मोबाईल 9926279636 को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उक्त सभी नोडल अधिकारियों के अधीनस्थ मुख्यालय के सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी सहायक नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे।
निर्देशों में यह भी कहा गया है कि भीषण गर्मी से प्रभावित छोटे एवं कम उम्र के पशुओं (वत्स), गाभिन गाय-भैंस तथा गंभीर रूप से बीमार पशुओं का प्राथमिकता के आधार पर उपचार किया जाए। साथ ही लू के दौरान आगजनी की घटनाओं की संभावना को देखते हुए पशुपालकों को सतर्क रहने एवं आवश्यक सावधानियां बरतने के लिए जागरूक किया जाएगा। आवारा पशुओं एवं पक्षियों के लिए पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु स्थानीय निकायों से समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त रेड क्रॉस सोसायटी, विभिन्न अशासकीय एवं धार्मिक संगठनों के सहयोग से भी आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे।
पशु चिकित्सा विभाग द्वारा सभी विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने स्तर पर लू-तापघात से बचाव हेतु कार्ययोजना तत्काल तैयार करें तथा आवश्यकतानुसार टीम गठित कर तत्परता से कार्य करें, ताकि किसी भी आपात स्थिति का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके। साथ ही यह भी निर्देशित किया गया है कि लू के कारण होने वाली पशु मृत्यु की जानकारी निर्धारित प्रपत्र में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए तथा उसकी प्रतिलिपि संबंधित कार्यालय को भी प्रेषित की जाए।

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