छत्तीसगढ़

विकसित भारत जी राम जी अधिनियम के संबंध में दी गई जानकारी

मुंगेली, 26 दिसम्बर 2025/sns/-कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार के निर्देशानुसार एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रभाकर पांडेय के मार्गदर्शन में जिले की सभी 367 ग्राम पंचायतों में विशेष ग्रामसभा का आयोजन किया गया। इन ग्रामसभाओं का उद्देश्य ग्रामीणों को नवीन एवं महत्वाकांक्षी योजना “विकसित भारत जी-राम-जी (विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन-ग्रामीण) अधिनियम, 2025” के प्रमुख प्रावधानों, उद्देश्यों एवं समेकित कार्ययोजना से अवगत कराना था।
विशेष ग्रामसभाओं के दौरान योजना की विस्तृत जानकारी दी गई और बताया गया कि यह अधिनियम राष्ट्रीय विजन के अनुरूप समृद्ध, आत्मनिर्भर एवं सशक्त ग्रामीण भारत के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। ग्रामीणों को योजना के लाभ, क्रियान्वयन प्रक्रिया एवं उनके अधिकारों की जानकारी सरल भाषा में समझाई गई।

क्या है विकसित भारत जी-राम-जी अधिनियम, 2025

इस अधिनियम के अंतर्गत अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी-रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान की जाएगी।

अब 125 दिन का सुनिश्चित रोजगार

पूर्व में 100 दिनों के रोजगार की व्यवस्था थी, जिसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी और आजीविका सुरक्षा और अधिक सुदृढ़ होगी।

विकसित भारत की जरूरतों के अनुरूप कार्य

अधिनियम के तहत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें जल सुरक्षा, मूलभूत ढांचा, आजीविका आधारित परिसंपत्तियां तथा जलवायु परिवर्तन एवं प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों से निपटने से संबंधित कार्य शामिल हैं।

तकनीक आधारित समेकित कार्ययोजना

वीबी जी-राम-जी के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर विकसित पंचायत की अवधारणा के अनुरूप योजनाएं तैयार की जाएंगी, जिन्हें पीएम गतिशक्ति एवं राष्ट्रीय स्थानिक योजना प्रणालियों से जोड़ा जाएगा। पंचायतों की भौगोलिक स्थिति, नगरीकरण की दिशा एवं स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास योजनाओं का निर्माण किया जाएगा।

खेती के समय कृषि को प्राथमिकता

बुवाई एवं कटाई के व्यस्त समय में कृषि श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को एक वित्तीय वर्ष में 60 दिनों की अवधि अधिसूचित करने की छूट दी गई है, जिससे किसानों को समय पर पर्याप्त श्रम मिल सके।

कार्य न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता

मांग के उपरांत निर्धारित समय-सीमा में कार्य उपलब्ध नहीं कराए जाने की स्थिति में राज्य सरकार द्वारा बेरोजगारी भत्ता प्रदान किया जाएगा, जिससे श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

पंचायती राज व्यवस्था होगी और अधिक सशक्त

अधिनियम के तहत ग्राम पंचायत प्राथमिक कार्यान्वयन इकाई होगी। श्रमिकों का पंजीकरण, रोजगार कार्ड जारी करना तथा कम से कम 50 प्रतिशत कार्यों का निष्पादन ग्राम पंचायतों द्वारा किया जाएगा। ग्रामसभाएं नियमित सामाजिक अंकेक्षण करेंगी, जबकि जनपद एवं जिला पंचायतें योजना के समेकन, पर्यवेक्षण एवं निगरानी की भूमिका निभाएंगी।

तकनीक से पारदर्शिता और जवाबदेही

नवीन अधिनियम में बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण, स्पेशियल टेक्नोलॉजी आधारित योजना निर्माण, मोबाइल डैशबोर्ड के माध्यम से निगरानी एवं साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। साथ ही सामाजिक अंकेक्षण तंत्र को और अधिक सुदृढ़ किया गया है। विशेष ग्रामसभाओं में ग्रामसभा अध्यक्ष, सरपंच, पंच, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने योजना को लेकर उत्साह व्यक्त किया और इसे रोजगार, आजीविका सुरक्षा एवं ग्रामीण विकास की दिशा में एक दूरगामी पहल बताया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *