बीजापुर, 17 अक्टूबर 2025/sns/ – रेबीज एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या है, जो 100 प्रतिशत जानलेवा है, किन्तु समय पर उपचार से पूर्णतः रोकी जा सकती है। भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक रेबीज मुक्त भारत का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी क्रम में राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत जिला बीजापुर में विभिन्न गतिविधियों को प्राथमिकता के साथ लागू किया जा रहा है।
एंटी रेबीज वैक्सीन एवं सीरम की उपलब्धता- जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) स्तर तक एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, गंभीर (कैटेगरी- III) मामलों में एंटी रेबीज सीरम देने हेतु मरीजों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों में संदर्भित करने की व्यवस्था की गई है। जिला अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) स्तर तक वैक्सीन एवं सीरम की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। मरीजों को सुरक्षित रूप से रेफर करने हेतु 108 एम्बुलेंस सेवा का उपयोग किया जाएगा।
घाव धुलाई की सुविधा- सभी स्वास्थ्य संस्थानों में साबुन एवं बहते पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। एंटी रेबीज क्लीनिक (ARC) में घाव धोने हेतु निरंतर साफ चलने वाले नल के पानी की व्यवस्था की जा रही है। वाशिंग एरिया में मानक संचालन प्रक्रिया SOP के पोस्टर प्रदर्शित किए जाएंगे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम- चिकित्सकों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ एवं मितानिनों को रेबीज प्रबंधन और पोस्ट एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) प्रोटोकॉल पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण उपरांत मॉनिटरिंग भी की जाएगी।
जन-जागरूकता अभियान- जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के समन्वय से स्कूलों में तथा पंचायत एवं नगरीय प्रशासन विभाग के सहयोग से अस्पताल, बाजार एवं सार्वजनिक स्थलों पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
अन्तर्विभागीय सहयोग- रेबीज नियंत्रण में पशुपालन, नगर निकाय, ग्रामीण विकास एवं शिक्षा विभागों के साथ समन्वय सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि सामूहिक रूप से लक्ष्य की प्राप्ति हो सके।
डाटा साझाकरण एवं रिपोर्टिंग- सभी पशु-काटने, कुत्ता काटने एवं संदिग्ध रेबीज के मामलों की रिपोर्टिंग राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण पोर्टल पर समय-सीमा में की जा रही है। साथ ही, पशुधन विकास विभाग एवं पशु चिकित्सा सेवाओं के साथ आंकड़े साझा किए जा रहे हैं।
कुत्तों का सामूहिक टीकाकरण एवं नसबंदी- पशुपालन विभाग एवं स्थानीय निकायों के सहयोग से कुत्तों के सामूहिक टीकाकरण एवं नसबंदी शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि संक्रमण के स्रोत पर नियंत्रण पाया जा सके।


