बीजापुर, 10 जनवरी 2026/sns/- राज्य सरकार की पुनर्वास नीति अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम दे रही है। नक्सल हिंसा से प्रभावित तथा नक्सली विचारधारा और हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट रहे पूर्व नक्सलियों को न केवल स्थायी आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं, बल्कि उन्हें गांव में ही सम्मानजनक रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी बीजापुर जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर सामने आई है। संदीप जिनके हाथों में ईट जुड़ाई और मिस्त्री कार्य का हुनर था, किन्तु नक्सल विचारधारा से जुड़े रहने के कारण उनका यह हुनर क्षेत्र में नक्सली स्मारक बनाने तक सीमित हो गया था। आत्मसर्पण करने के बाद उनके हाथों के हुनर को दिशा मिली और संदीप ने इसे अपने हुनर का उपयोग अपने प्रधानमंत्री आवास निर्माण किया और आज वे गांव में अन्य प्रधानमंत्री आवासों के निर्माण में राजमिस्त्री का कार्य कर रहे हैं। बीते एक वर्ष में उन्होंने इस कार्य से लगभग 30 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित की है।
आत्मसमर्पण से आत्मनिर्भरता तक का सफर- संदीप बताते हैं कि वे वर्ष 2017 में संगम सदस्य के रूप में नक्सल संगठन से जुड़े थे। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उन्होंने आत्मसमर्पण किया था। प्रारंभ में उनका नाम आवास सूची में नहीं था, लेकिन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की नक्सल हिंसा से प्रभावित एवं आत्मसमर्पण कर चुके व्यक्तियों के लिए चलाई जाने वाली विशेष परियोजना की बदौलत आवश्यक दस्तावेज तैयार कर वर्ष 2024 में उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास की स्वीकृति मिली।
उन्होंने बताया कि उन्हें पहले से ईंट जोड़ाई का कार्य आता था, इसी कारण उन्होंने अपना आवास स्वयं अपने हाथों से बनाया। जैसे-जैसे उनका आवास आकार लेता गया, वैसे-वैसे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता गया। अब उनका आवास पूर्ण हो चुका है, जिसे देखकर उन्हें गर्व और खुशी होती है।
हुनर बना रोजगार का साधन- संदीप के कार्य को देखकर गांव के अन्य प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों ने भी अपने पीएम आवास निर्माण का कार्य उन्हें सौंपना शुरू कर दिया। वर्तमान में वे गांव के 4 अन्य हितग्राहियों के आवास निर्माण का कार्य कर रहे हैं, और अब तक लगभग 30 हजार रुपये की आय अर्जित कर चुके हैं।
पंचायत विभाग की पहल RSETI के माध्यम से राजमिस्त्री प्रशिक्षण की सुविधा- जिला प्रशासन द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जिले स्थित RSETI में राजमिस्त्री का प्रशिक्षण प्रदान भी किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से हितग्राही न केवल अपने आवास का निर्माण स्वयं कर सकते हैं, बल्कि अन्य आवासों का निर्माण कर अपनी आजीविका भी सुनिश्चित कर रहे हैं।
यह पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की एक अभिनव पहल है, जिसके अंतर्गत नक्सल हिंसा से प्रभावित एवं आत्मसमर्पण कर चुके व्यक्तियों को कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। संदीप को इस प्रशिक्षण से जोड़कर उनके हुनर को आधार देने की तैयारी भी है। जिससे उन्हें ऋण की सुविधा सहित तकनीकी ज्ञान भी मिल सके।



