बलौदाबाजार, 13 फ़रवरी2026/sns/- परीक्षा के समय बच्चों में तनाव, डर, घबराहट और बेचैनी होना सामान्य
बात है,लेकिन सही जानकारी,मार्गदर्शन और सहयोग से इसे आसानी से संभाला जा
सकता है।*परीक्षा के समय तनाव के प्रमुख कारण*- परीक्षा के समय
बच्चों में तनाव में कई कारण हो सकते है जिनमे प्रमुख रुप से अच्छे नंबर
लाने का अत्यधिक दबाव,माता-पिता और शिक्षकों की ज्यादा उम्मीदें,पढ़ाई का
अधिक बोझ,समय प्रबंधन की कमी,तुलना और प्रतियोगिता का डर,नींद की कमी,सोशल
मीडिया और मोबाइल का अधिक उपयोग एवं असफलता का डर है।*मानसिक तनाव के लक्षण*- शारीरिक लक्षण में पढ़ाई में मन न लगना,सिर दर्द,आत्मविश्वास की कमी,थकान,नींद न आनानिराशा और उदासी,भूख कम लगना,अकेले रहने की इच्छा,घबराहट, दिल की धड़कन तेज होना आदि है। मानसिक लक्षण में बार-बार रोने का मन करना, चिड़चिड़ापन है।*तनाव से बचाव के आसान उपाय*-विद्यार्थियों के लिएरोज
पढ़ाई का समय तय करें,बीच-बीच में ब्रेक लें,6-8 घंटे की नींद लें,रोज
हल्का व्यायाम करें मोबाइल एवं सोशल मीडिया सीमित रखें,अपने डर और समस्या
किसी से साझा करें, संतुलित आहार लें,खुद को दूसरों से तुलना न करें।*माता-पिता
के लिए सुझाव*- बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें, नंबर से ज्यादा प्रयास
की सराहना करें,बच्चे की भावनाओं को समझें,सकारात्मक वातावरण बनाएं,रोज़
बच्चे से बातचीत करें,आवश्यकता पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की मदद
लेनी चाहिए।*शिक्षकों की भूमिका*- बच्चों को प्रेरित करना,डर का
माहौल न बनने देना,कमजोर बच्चों को विशेष सहयोग देना एवं मानसिक स्वास्थ्य
पर खुलकर बात करना चाहिए।*मानसिक स्वास्थ्य परामर्श जरूरी* –
मानसिक स्वास्थ्य परामर्श से आत्मविश्वास बढ़ता है,तनाव को सही दिशा मिलती
है।आत्महत्या जैसे खतरों से बचाव होता है।

