सुकमा, 09 जनवरी 2026/sns/- छत्तीसगढ़ राज्य के अंतिम छोर में स्थित दूरस्थ नक्सल प्रभावित सुकमा जिला कृषि और मत्स्य पालन के क्षेत्र में नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। पारंपरिक रूप से धान की खेती पर निर्भर रहने वाला यह क्षेत्र अब आधुनिक मत्स्य पालन, विशेषकर झींगा पालन की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है। कलेक्टर श्री अमित कुमार के कुशल निर्देशन में जिले की पांच ग्राम पंचायतों में झींगा पालन की नई शुरुआत की गई है।
पांच पंचायतों के 17 तालाबों में प्रयोग शुरू
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, जिले के भेलवापाल, झापरा, गोंगला, मुरातोंडा और गादीरास ग्राम पंचायतों के कुल 17 तालाबों को झींगा पालन के लिए चयनित किया गया है। इसके अतिरिक्त, तकनीकी मार्गदर्शन के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) मुरातोंडा में एक विशेष श्डेमोंस्ट्रेशन यूनिटश् भी स्थापित की गई है, ताकि कृषक वैज्ञानिक पद्धति को बारीकी से समझ सकें। विशेषज्ञों ने किया मौका मुआयना मत्स्य पालन की बारीकियों को समझने और उत्पादन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए हाल ही में विशेषज्ञों के एक दल ने सभी चिन्हित तालाबों का गहन निरीक्षण किया। इस दल में मत्स्य विशेषज्ञ डॉ. संजय सिंह राठौर, मत्स्य विभाग से श्री डी.एल. कश्यप और एनआरएलएम जनपद सुकमा के संयोजक शामिल थे।
बढ़ेगा मुनाफा, बदलेगी पहचान
अब तक सुकमा के तालाबों में मुख्य रूप से कतला, रोहू, ग्रास कार्प और पेटला मछलियों का पालन होता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि झींगा पालन की शुरुआत से स्थानीय मछुआरों और कृषकों के मुनाफे में भारी बढ़ोतरी होगी। प्रशासन का यह कदम न केवल सुकमा को मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगा, बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगा।

