जगदलपुर, 13 दिसम्बर 2025/sns/- बदलते बस्तर में आज एक नई कहानी लिखी जा रही है। अपनी ऊर्जा और आत्मविश्वास का उपयोग नुआ बाट के खिलाड़ियों द्वारा मेडल जीतने के लिए किया जा रहा है।
जो हाथ कभी विध्वंसक कार्य के लिए उठते थे, वे आज खेल मैदान में मैडल उठाने का लक्ष्य लेकर उतर रहे हैं। यह बदलाव खेल के साथ ही बस्तर की सोच, संस्कृति और भविष्य का भी प्रतीक बन गया है।
संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक में सभी जिलों के नुवा बाट खिलाड़ी अपने पारंपरिक कौशल और नई ऊर्जा के साथ शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।
मैदान में उतरते ही उनके चेहरों पर जीत का आत्मविश्वास और खेलते समय झलकती प्रतिबद्धता दर्शाती है कि वे अवसर मिलने पर किसी भी मंच पर अपनी प्रतिभा साबित कर सकते हैं।
बड़े मंच पर खेलना हमारे लिए गर्व की बात
नारायणपुर से आई नुवा बाट खिलाड़ी चैते और माड़वी ने कहा कि हम पहली बार बस्तर ओलम्पिक में शामिल हुए और यहाँ रस्सा-कसी और तीरंदाजी खेलकर हमें बहुत अच्छा लगा। इतने बड़े मंच पर खेलना हमारे लिए गर्व की बात है। शासन द्वारा की गई भोजन, आवास और खेल सामग्रियों की व्यवस्था भी बेहद अच्छी है, जिससे हमें बिना किसी चिंता के अपना खेल खेलने का मौका मिला है।
कबड्डी, तीरंदाजी, खो-खो जैसे खेलों में नुवा बाट खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए दर्शकों का दिल जीता। तीरंदाजी में उनकी एकाग्रता और पारंपरिक कौशल आकर्षण का केंद्र रही, जबकि कबड्डी में फुर्ती और दमखम ने दर्शकों को तालियाँ बजाने पर मजबूर कर दिया।
मैदान में जमा जनसमूह ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हर अच्छे प्रदर्शन पर गूंजती तालियाँ और खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को और मजबूत कर रहा था।
अधिकारियों, समाज के बुद्धिजीवियों और स्थानीय नागरिकों ने भी खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाते दिखे।
बस्तर ओलम्पिक में नुवा बाट खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि खेल अब बदलते बस्तर की नई भाषा बन चुका है।

