छत्तीसगढ़

पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 21वीं किश्त के रूप मे सुकमा जिले के 22,582 किसानों के खातों में पहुंचे 4.51 करोड़ रुपये

सुकमा, 19 नवंबर 2025/sns/- प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा 19 नवम्बर, 2025 को तमिलनाडु के कोयंबटूर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) की 21वीं किस्त जारी की गई। इसके परिणामस्वरूप सुकमा जिले के 22,582 किसानों के बैंक खातों में 4.51 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित की गई।
इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विभाग सुकमा के संयुक्त तत्वावधान में कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती गीता कवासी, जिला पंचायत सदस्या उपस्थित रहीं, कार्यक्रम में अध्यक्ष के रूप में मुरतोंडा के सरपंच श्री मुक्का राम नाग, विशिष्ठ अथिति के रूप मे श्री दिलीप पेददी, श्री मंगल सिह नाग तथा जिले के तीनों विकासखंडों से किसान मित्रों सहित कुल 245 किसान भाई-बहनों ने सहभागिता की।
मुख्य अतिथियों एवं जनप्रतिनिधियों ने किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, राज्य एवं केंद्र सरकार की अन्य किसानोन्मुखी योजनाओं तथा कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा उपलब्ध कराई जा रही नवीन तकनीकों का अधिकतम लाभ उठाने हेतु प्रेरित किया।
तकनीकी जानकारी एवं प्रशिक्षण
सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी श्री कैलाश मरकाम ने पीएम किसान योजना हेतु आवश्यक दस्तावेजों तथा पंजीयन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी प्रदान की। साथ ही कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं गतिविधियों का भी विवरण साझा किया। कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक श्री आर.पी. कश्यप ने तिलहन समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन के अंतर्गत सफेद तिल की उन्नत किस्म श्उन्नत रामाश् की विशेषताओं एवं उत्पादन तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में जिले में 198 हेक्टेयर क्षेत्र में तिलहन फसलों के अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन प्रस्तावित हैं। किसानों को तिल में लगने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों के प्रबंधन पर भी प्रशिक्षण दिया गया।
डॉ. योगेश कुमार सिदार एवं भीम कुमार जायसवाल ने प्राकृतिक खेती के महत्व एवं उसके विभिन्न घटकों पर विस्तारपूर्वक मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि देशी गाय के गोबर एवं गौमूत्र से जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र एवं ब्रह्मास्त्र जैसे प्रभावी जैविक घोल तैयार किए जा सकते हैं, जिनके उपयोग से खेती की लागत कम होती है, मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है तथा उत्पादन पूर्णतः रसायनमुक्त एवं सुरक्षित बनता है। उन्होंने इन घोलों की निर्माण विधि, उपयोग मात्रा, छिड़काव समय एवं सावधानियों की भी जानकारी दी।
मासिक समीक्षा कार्यशाला सम्पन्न
कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि एवं संबंधित विभागों की मासिक समीक्षा कार्यशाला भी आयोजित की गई, जिसमें अधिकारियों ने आगामी फसल की तैयारी, योजनाओं की प्रगति एवं भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा की।
कार्यक्रम में कृषि विभाग से कैलाश मरकाम, भीम कुमार जायसवाल, केमन विश्वकर्मा तथा कृषि विज्ञान केंद्र से वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख एच.एस. तोमर, कृषि वैज्ञानिक राजेन्द्र प्रसाद कश्यप, डॉ. योगेश कुमार सिदार, मयूरी ठाकुर, गुलशन वर्मा एवं केंद्र के कर्मचारी परमेश सिंह शोरी, ज्योतिष कुमार पोटला, लक्ष्मी, नंदा आदि उपस्थित थे।
कृषि विज्ञान केंद्र के सभी वैज्ञानिकों द्वारा अपने-अपने विषयों से संबंधित आगामी माह की कार्याेजनाएँ प्रस्तुत की गई तथा किसानों को आवश्यक तकनीकी सुझाव भी प्रदान किए गए। कार्यक्रम का समापन एवं आभार प्रदर्शन वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख श्री एच.एस. तोमर द्वारा किया गया।

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