अम्बिकापुर, 21 अगस्त 2025/sns/- माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली की सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी (SCCORS) ने देशभर के राज्यों और जिलों को सड़क सुरक्षा उपायों के क्रियान्वयन में सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ शासन परिवहन विभाग ने सभी जिला अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि जिला सड़क सुरक्षा समिति (DRSC) की बैठक का कार्यवृत (MOM) और कार्यवाही रिपोर्ट अनिवार्य रूप से सड़क सुरक्षा पोर्टल http://morth-roadsafety.nic.in/edisha/index.aspx पर समय-सीमा में अपलोड की जाए।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन परिवहन विभाग के पत्रों का हवाला देते हुए कहा गया है कि कार्यवृत अपलोड करने में लापरवाही को माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी ने गंभीरता से लिया है। इसलिए सभी जिला सड़क सुरक्षा समितियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि बैठकें नियमित रूप से आयोजित हों और उनकी रिपोर्ट पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि प्रभावी निगरानी और रिपोर्टिंग हो सके।
दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार योजना लागू इसके साथ ही सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने दिनांक 05 मई 2025 से “सड़क दुर्घटना पीड़ितों का नकदी रहित उपचार स्कीम, 2025“ लागू की है। इस योजना के अंतर्गत किसी भी सड़क दुर्घटना के पीड़ित को दुर्घटना की तारीख से 7 दिन की अवधि तक नामांकित अस्पतालों में 1.50 लाख रुपए तक का मुफ्त कैशलेस उपचार मिलेगा।
राज्य सड़क सुरक्षा परिषद (SRSC) को इस योजना का नोडल एजेंसी बनाया गया है। परिषद को यह सुनिश्चित करना होगा कि राज्य के सभी अधिकृत अस्पतालों में सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा मिले। राज्य सरकार को ट्रॉमा एवं पॉली-ट्रॉमा केयर देने वाले अस्पतालों को योजना में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही नामांकित अस्पतालों को उपचार के लिए समय पर भुगतान की व्यवस्था भी की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी ने स्पष्ट किया है कि सड़क सुरक्षा समितियों की बैठक रिपोर्ट अपलोड न करने पर इसे गंभीर गैर-अनुपालन माना जाएगा। जिला अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे व्यक्तिगत रूप से इसकी निगरानी करें और त्रैमासिक रिपोर्ट नियमित रूप से प्रस्तुत करें।


