छत्तीसगढ़

सफलता की कहानी आधुनिक तकनीक से माखन सोनवानी ने मछली पालन में रचा कीर्तिमान, 10 महीने में 03 लाख से अधिक का हुआ लाभ

मुंगेली, 07 मार्च 2026/sns/- जिले के परमहंस वार्ड निवासी श्री माखन सोनवानी आज क्षेत्र के मत्स्य पालकों और किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं। पारंपरिक खेती के साथ-साथ उन्होंने आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए मछली पालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (पीएमएमएसवाय) का लाभ उठाकर उन्होंने कम समय में अच्छी आमदनी प्राप्त की और यह साबित किया कि यदि सही तकनीक और मेहनत का साथ हो तो मछली पालन भी किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन सकता है।

आधुनिक तकनीक अपनाकर बदली किस्मत श्री माखन सोनवानी पहले पारंपरिक तरीके से खेती करते थे, लेकिन आय सीमित होने के कारण वे कुछ नया करने की सोच रहे थे। इसी दौरान उन्हें मत्स्य विभाग के माध्यम से प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के बारे में जानकारी मिली। अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने पौंड लाइनर तकनीक से मछली पालन करने का निर्णय लिया। इस तकनीक के तहत उन्होंने लगभग 1421 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में पौंड लाइनर लगाकर तालाब नुमा टैंक तैयार किया। इसका मुख्य लाभ पानी का रिसाव नहीं होता, जिससे पानी लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और मछलियों की वृद्धि के लिए नियंत्रित एवं अनुकूल वातावरण मिलता है। साथ ही इससे पानी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी आसानी होती है।

उच्च गुणवत्ता वाली मछली प्रजाति का किया चयन

माखन सोनवानी ने अपने तालाब में पंगेशियस प्रजाति की मछलियों के 10 हजार बीजों का स्टॉक किया। यह प्रजाति तेजी से बढ़ने वाली और बाजार में अधिक मांग वाली मछली मानी जाती है। उन्होंने मत्स्य विभाग के मार्गदर्शन में नियमित रूप से मछलियों को संतुलित आहार दिया और समय-समय पर दवाओं का उपयोग कर मछलियों को रोगमुक्त रखा। उन्होने बताया कि मछली पालन में समय पर दाना (फीड), पानी की गुणवत्ता और रोग नियंत्रण का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। सही प्रबंधन से उत्पादन भी बढ़ता है और बाजार में मछलियों की अच्छी कीमत मिलती है। लगातार मेहनत और सही तकनीक के उपयोग का परिणाम यह रहा कि लगभग 10 महीने के भीतर ही मछलियां बाजार में बिक्री के लिए तैयार हो गईं। जब हार्वेस्टिंग की गई, तो मछलियों का औसत वजन करीब  एक किलोग्राम प्रति मछली तक पहुंच गया। उन्होंने तालाब से लगभग 8 हजार 500 किलोग्राम (85 क्विंटल) मछली का उत्पादन प्राप्त हुआ। स्थानीय बाजार में मछलियों की अच्छी मांग होने के कारण उन्हें 105 प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिक्री मूल्य मिला।

माखन सोनवानी की इस सफल पहल से उन्हें अच्छा आर्थिक लाभ मिला। महज 10 महीने में उन्हें 03 लाख रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ, जो कि पारंपरिक खेती की तुलना में काफी बेहतर है। माखन सोनवानी की सफलता को देखकर आसपास के कई किसान भी अब मछली पालन की ओर आकर्षित हो रहे हैं। वे स्वयं भी किसानों को इस व्यवसाय के बारे में जानकारी देते हैं और बताते हैं कि यदि वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन किया जाए तो कम क्षेत्र में भी अच्छी आय अर्जित की जा सकती है।
उन्होंने इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना ने मेरे जैसे छोटे किसानों और उद्यमियों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया है। आधुनिक तकनीक अपनाकर और सही मार्गदर्शन के साथ किसान अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं। उन्होने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

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