सुकमा, 5 फरवरी 2026/sns/-जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत, कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के. सिंह के मार्गदर्शन में जिले के टीबी मरीजों को निरंतर पोषण सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
जन-भागीदारी से मजबूत होती लड़ाई
स्वास्थ्य विभाग की अपील और सतत प्रयासों का ही परिणाम है कि जिले में अब तक 263 निक्षय मित्र बनाए जा चुके हैं, जो टीबी रोगियों के उपचार और पोषण की जिम्मेदारी उठा रहे हैं। इसी कड़ी में आज “समर्पित सेवा संस्था“ ने सुकमा के दो टीबी मरीजों को “फूड बास्केट“ वितरित कर मानवता की मिसाल पेश की। संस्था द्वारा पूर्व में भी जिले के अनेक मरीजों को सहायता प्रदान की जा चुकी है।
क्यों जरूरी है पोषण आहार?
विशेषज्ञों के अनुसार, टीबी के उपचार में दवाओं के साथ-साथ संतुलित आहार का होना अनिवार्य है।
’ रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity): बेहतर पोषण से शरीर की इम्युनिटी बढ़ती है।
’ त्वरित रिकवरी: आवश्यक विटामिन्स और प्रोटीन्स उपचार के प्रभाव को तेज करते हैं।
’ सशक्त कदम: यह पहल मरीजों को मानसिक संबल प्रदान करती है कि वे इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं।
जिला प्रशासन की भावुक अपील
वितरण कार्यक्रम के दौरान जिला प्रशासन ने समाज के सक्षम और समर्थवान लोगों से आगे आने की अपील की है। संस्था का कहना है कि यदि अधिक लोग “निक्षय मित्र“ बनकर मरीजों को गोद लेंगे, तो सुकमा को टीबी मुक्त करने का सपना जल्द ही साकार होगा।

