जगदलपुर, 16 मार्च 2026/sns/- विकास की एक नई किरण बिहान योजना के माध्यम से चमक रही है, जहाँ ग्रामीण महिलाएं अपनी मेहनत और हौसले से सफलता की नई इबारत लिख रही हैं। इसी कड़ी में बस्तर जिले के दरभा विकासखण्ड की ग्राम पंचायत चिगंपाल की रहने वाली श्रीमती बालमती बघेल की कहानी आज हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। एक सामान्य गृहणी से सफल व्यवसायी बनने तक का उनका यह सफर चुनौतियों और दृढ़ संकल्प से भरा रहा है
बालमती बघेल ने बताया कि पहले उनके निर्धन परिवार का जीवन यापन का साधन पारंपरिक खेती-किसानी और पशुपालन था। इसे मद्देनजर रखते हुए जब शासन की महत्वाकांक्षी योजना बिहान (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) के तहत सीआरपी दीदियों ने उनके गाँव में महिला समूहों का गठन शुरू किया, तो बालमती ने भी इस बदलाव का हिस्सा बनने का साहसी निर्णय लिया। वे मां दुर्गा महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं और नियमित साप्ताहिक बैठकों के साथ-साथ बचत और आपसी लेनदेन की बारीकियों को सीखना शुरू किया।
समूह से जुड़ने के बाद बालमती दीदी के आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ। उन्होंने रिवॉल्विंग फंड सहित सीआईएफ और बैंक लिंकेज के माध्यम से ऋण प्राप्त किया और इस पूंजी को अपने खेती-बाड़ी एवं पशुपालन के कार्यों को विस्तार देने में निवेश किया। उनकी इस लगन का परिणाम आज उनकी आय के आंकड़ों में स्पष्ट दिखाई देता है। वर्तमान में वे खेती-बाड़ी से वार्षिक 70 हजार रुपए और पशुपालन एवं कुक्कुटपालन से 60 हजार रूपए से ज्यादा अर्जित कर रही हैं, जिससे उनकी कुल वार्षिक आय लगभग डेढ़ लाख रुपए तक पहुँच गई है। आज बालमती बघेल न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं और घर परिवार को खुशहाली की ओर अग्रसर कर चुकी हैं। साथ ही समाज में अपने विचारों को मुखरता से व्यक्त कर रही हैं और अन्य महिलाओं को भी सशक्त बनाने में अपना योगदान दे रही हैं। एनआरएलएम बिहान टीम के सहयोग से उनकी यह सफलता दर्शाती है कि कैसे सही अवसर और संसाधन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं खुद की पहचान बना सकती हैं।

