अम्बिकापुर, 09 मार्च 2026/sns/- शासकीय रानी दुर्गावती महाविद्यालय, वाड्रफनगर तथा नवीन शासकीय महाविद्यालय रघुनाथनगर के संयुक्त तत्वावधान में “Indigenous Knowledge and Sustainable Rural Development (स्वदेशी ज्ञान एवं सतत ग्रामीण विकास)” विषय पर एक दिवसीय बहु-विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से 150 से अधिक प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10 बजे दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने स्वागत उद्बोधन देते हुए स्वदेशी ज्ञान की उपयोगिता तथा ग्रामीण विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, अंबिकापुर के कुलपति प्रो. राजेंद्र लाखपाल ने अपने मुख्य वक्तव्य में कहा कि भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली में प्रकृति के साथ संतुलित जीवन का संदेश निहित है तथा इसे आधुनिक विकास के साथ जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी ज्ञान प्रणाली ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत उपयोगी है। संगोष्ठी के अंतर्गत आयोजित विभिन्न तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता श्री श्याम बिहारी यादव एवं सह-अध्यक्षता डॉ. ईश्वर लाल खरे ने की, जिसमें डॉ. रक्षा सिंह ने उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में स्वदेशी ज्ञान प्रणाली को समाहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. पुनीत राय तथा सह-अध्यक्षता श्री प्रेमचंद यादव ने की। इस सत्र में डॉ. आनंद सुगंधे ने सतत विकास में भारतीय ज्ञान प्रणाली की भूमिका पर प्रकाश डाला। तृतीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. सी.एल. पाटले एवं सह-अध्यक्षता डॉ. रश्मि पांडेय ने की, जिसमें डॉ. राजकिरण प्रभाकर ने ग्रामीण विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के उपयोग और संभावनाओं पर व्याख्यान दिया। चतुर्थ तकनीकी सत्र में विभिन्न राज्यों से आए प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों द्वारा अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इस सत्र में प्रतिभागियों ने ऑफलाइन तथा ऑनलाइन दोनों माध्यमों से सहभागिता की। समापन सत्र में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने सभी वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। श्री जगदीश खुर्शो ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया तथा राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।


