छत्तीसगढ़

बस्तर की माटी में घुली अंतरराष्ट्रीय महक


जगदलपुर, 24 फरवरी 2026/sns/-
छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक और प्राकृतिक वैभव के प्रतीक बस्तर जिले में इन दिनों अंतरराष्ट्रीय पर्यटन की एक नई इबारत लिखी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और हिवा कोचिंग एंड कंसल्टिंग की संस्थापक सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन के छह दिवसीय प्रवास का दूसरा दिन बस्तर की अनूठी परंपराओं और आत्मीय आतिथ्य के नाम रहा। सुश्री किर्सी का कारवां मंगलवार को ग्राम धुड़मारास की सुंदर वादियों में पहुँचा, जहाँ धुरवा डेरा होमस्टे में उनका स्वागत किसी उत्सव से कम नहीं था। धुड़मारास की धरती पर कदम रखते ही सुश्री किर्सी का अभिनंदन स्थानीय परंपरा के अनुसार सिहाड़ी और महुए की विशेष माला पहनाकर किया गया। इस दौरान बस्तर की लोक संस्कृति की जीवंत झलक तब देखने को मिली, जब स्थानीय ग्रामीणों ने धुरवा नृत्य की थाप और पारंपरिक स्वागत गीतों के साथ उनकी अगवानी की। आत्मीयता के साथ किए गए इस स्वागत से सुश्री किर्सी अभिभूत नजर आईं और कहा कि उन्हें अपने जीवन में इस तरह की अनुभूति पहली बार हो रही है।
आत्मीय स्वागत के पश्चात सुश्री किर्सी ने बस्तर के पारंपरिक खान-पान का लुत्फ उठाया, जहाँ दोपहर के भोजन में उन्हें पूरी तरह स्थानीय और जैविक व्यंजनों से सजी थाली परोसी गई। बस्तर के जायके का अनुभव करते हुए उन्होंने कलम भाजी, सेमी की सब्जी, बोदई की सब्जी और केले की सब्जी जैसे स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लिया। इसके साथ ही उड़द की दाल, तीखी इमली की चटनी और कोसरा भात के साथ बस्तर के पारंपरिक पेय मंडिया पेज को परोसा गया। बस्तर के इन पारंपरिक स्वादों ने विदेशी अतिथि को यहाँ की संस्कृति के और भी करीब ला दिया।

सुश्री किर्सी का यह प्रवास मुख्य रूप से धुड़मारास और उसके आसपास के क्षेत्रों को विश्व स्तरीय पर्यटन मानकों के अनुरूप ढालने पर केंद्रित है। धुरवा डेरा होमस्टे में रुककर वे न केवल स्थानीय जीवनशैली का प्रत्यक्ष अनुभव ले रही हैं, बल्कि ग्रामीणों और हितधारकों के साथ सीधा संवाद कर पर्यटन के नए अवसरों की पहचान भी कर रही हैं। जिला प्रशासन बस्तर और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के समन्वय से आयोजित इस भ्रमण के दौरान वे स्थानीय समुदाय को यूनाइटेड नेशंस बेस्ट टूरिज्म विलेज अपग्रेड प्रोग्राम की बारीकियों से अवगत करा रही हैं। यह तकनीकी मेंटरशिप और सूक्ष्म योजना कार्य बस्तर की समृद्ध विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ यहाँ के युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खोलने में मील का पत्थर साबित होगा।
इससे पहले सुश्री किर्सी ने सुबह चित्रकोट जलप्रपात में नौका विहार का अनुभव लेने के साथ ही मेंदरी घूमर पहुंचकर पर्यटन संबंधी गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने यहां स्थानीय हितग्राहियों के साथ पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने के सम्बन्ध में भी चर्चा की। इस दौरान भारत सरकार के पर्यटन विभाग की सुश्री मंजीरी  कमलापुरकर, छत्तीसगढ़ के पर्यटन विभाग की सुश्री शुभदा चतुर्वेदी तथा बस्तर जिला प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।+

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