कवर्धा, 23 फरवरी 2026/sns/-साइकिल मिलने से बेटियों के लिए स्कूल आना-जाना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। उन्हें लंबी दूरी पैदल तय नहीं करनी पड़ती, जिससे समय और मेहनत दोनों की बचत होती है। अब वे सुरक्षित, समय पर और बिना थके स्कूल पहुंच रही हैं तथा पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी पढ़ाई और भविष्य के सपनों की ओर आगे बढ़ रही हैं।
कवर्धा जिले में बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए संचालित सरस्वती साइकिल योजना एक सफल पहल साबित हो रही है। बीते दो वर्षों में जिले की 14,356 छात्राओं को इस योजना के तहत निःशुल्क साइकिलें प्रदान की गई हैं, जिससे बड़ी संख्या में बालिकाओं को सीधा लाभ मिला है। पहले दूरस्थ वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं को स्कूल पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। कठिन रास्तों और लंबी दूरी के कारण वे थक जाती थीं और कई बार पढ़ाई भी प्रभावित होती थी, जिससे कुछ छात्राएं स्कूल छोड़ने तक पर मजबूर हो जाती थीं। लेकिन साइकिल मिलने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है। अब छात्राएं आसानी से और कम समय में स्कूल पहुंच जाती हैं। स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़ी है और पढ़ाई के प्रति रुचि भी पहले से अधिक हुई है।
छात्राओं का कहना है कि अब वे समय पर स्कूल पहुंचती हैं और थकान भी नहीं होती, इसलिए कक्षा में ध्यान से पढ़ पाती हैं। कई छात्राएं स्कूल के बाद घर के कामों में भी मदद कर लेती हैं और फिर पढ़ाई के लिए समय निकाल पाती हैं। अभिभावकों को भी अब अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर पहले जैसी चिंता नहीं रहती। आज कवर्धा जिले की सड़कों पर समूह में साइकिल चलाकर स्कूल जाती बेटियां आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की नई मिसाल बन रही हैं। यह योजना केवल साइकिल देने तक सीमित नहीं है, बल्कि बेटियों को शिक्षा से जोड़कर उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव तैयार कर रही है। सरस्वती साइकिल योजना सच मायनों में जिले में बालिका शिक्षा को नई गति देने वाली एक सफल और प्रेरणादायक पहल बन चुकी है।


