छत्तीसगढ़

भिलाई में ग्रीन स्टील पर संवाद का आयोजन संपन्न

दुर्ग, 17 फरवरी 2026/sns/- इस्पात उद्योग भारत की आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और वर्तमान समय में यह सतत विकास एवं जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में परिवर्तन के केंद्र में भी है। इसी दिशा में 16 फरवरी 2026 को होटल अमित पार्क, भिलाई में “ग्रीन स्टील पर संवाद” का आयोजन किया गया। यह पहल जिला नवाचार केंद्र (डीआईएच), दुर्ग द्वारा संचालित टीआईएसएस इन्क्यूब फाउंडेशन (टीआईएफ) के माध्यम से की गई, जो टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान मुंबई की सामाजिक प्रभाव उन्मुख इनक्यूबेशन पहल है। कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्र में ग्रीन स्टील उत्पादन हेतु दीर्घकालिक रोडमैप तैयार करने के लिए एक सशक्त मंच की शुरुआत करना था। छत्तीसगढ़ देश के कच्चे इस्पात उत्पादन में अग्रणी राज्यों में से एक है। ऐसे में राज्य की उद्योग इकाइयों की भूमिका इस्पात उत्पादन में हरित एवं नवाचार आधारित तकनीकों को अपनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

चर्चा के प्रमुख विषय –

प्रक्रिया अनुकूलन के माध्यम से ऊर्जा दक्षता। इस्पात निर्माण में नवीकरणीय ऊर्जा का समावेशन। स्क्रैप वैल्यू चेन को सुदृढ़ करना। डीकार्बाेनाइजेशन हेतु वित्तीय तंत्र। लो-कार्बन स्टील में उभरते नवाचार। वैश्विक स्तर पर ग्रीन स्टील की धारणा एवं बाजार संभावनाएँ। क्षेत्र में अपनाए जा सकने वाले श्रेष्ठ अभ्यास।

प्रमुख वक्ता एवं सहभागिता

कार्यक्रम में भिलाई स्टील प्लांट के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए, जिनमें शामिल थे। श्री तपस दासगुप्ता, पूर्व मुख्य महाप्रबंधक (इंचार्ज)। श्री संजीव नैय्यर, मुख्य महाप्रबंधक (इंचार्ज)। श्री के  वि शंकर, महाप्रबंधक (गुणवत्ता) एवं सचिव, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स-भिलाई चौप्टर। सतत विकास के क्षेत्र से स्विचऑन फाउंडेशन के प्रतिनिधियों श्री उद्दीप नंदी (वरिष्ठ उप महाप्रबंधक-संचालन) एवं श्री अनुपम राय (सलाहकार) ने ऑनलाइन माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत किए। इसके अतिरिक्त शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज दुर्ग, शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज रायपुर, सीएसआईटी दुर्ग, डीटीआईसी दुर्ग के स्टार्टअप प्रतिनिधि, गोदावरी पावर के अधिकारी, इस्पात व्यापारी एवं नवाचार उद्यमी भी संवाद का हिस्सा बने।

प्रमुख निष्कर्ष

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों के बीच गहन चर्चा हुई, जिसमें ऊर्जा ऑडिट आधारित एमएसएमई समाधान, सर्कुलर स्क्रैप नेटवर्क, ग्रीन फाइनेंसिंग मॉडल तथा अन्य व्यावहारिक पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। कई ऐसे विचार सामने आए जिन्हें युवा पीढ़ी उद्यम के रूप में विकसित कर सकती है।

आगे की दिशा

आयोजकों का उद्देश्य इस संवाद को एक सतत मंच के रूप में विकसित करना है, जहाँ उद्योग, शिक्षाविद, शोधार्थी एवं स्टार्टअप मिलकर ग्रीन स्टील के क्षेत्र में नवाचार एवं पायलट परियोजनाओं पर कार्य कर सकें। इस्पात उद्योग का डीकार्बाेनाइजेशन केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि एक आर्थिक अवसर भी है। भिलाई कृ “स्टील सिटी ऑफ इंडिया” कृ इस परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। ग्रीन स्टील की दिशा में यह पहल एक सशक्त शुरुआत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *