छत्तीसगढ़

प्रशासनिक कार्य-व्यवहार म छत्तीसगढ़ी के उपयोग पर प्रशिक्षण आयोजित

अंबिकापुर, 09 फरवरी 2026/sns/-  छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा प्रशासनिक कार्य व्यवहार म छत्तीसगढ़ी भाषा का उपयोग विषय पर आज जिला पंचायत के सभाकक्ष में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में अपर कलेक्टर श्री अमृत लाल ध्रुव, श्री विनय सोनी, राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार, वक्ता डॉ चितरंजन कर और एडिशनल सीईओ श्रीमती नेहा सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। जिले के सभी विभाग प्रमुखों और अधिकारियों ने इस प्रशिक्षण में भाग लिया।

राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने छत्तीसगढ़ी भाषा के गौरवशाली इतिहास और उसके प्रशासनिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा केवल एक संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। इसे संरक्षित करना और प्रशासनिक कार्यों में लागू करना हमारी जिम्मेदारी है। इसके लिए छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा “लोक व्यवहार में छत्तीसगढ़ी” नामक एक मार्गदर्शिका प्रकाशित की गई है। इस पुस्तक में हिंदी के 67 शब्दों और वाक्यों का छत्तीसगढ़ी अनुवाद, नोटशीट, छुट्टी आवेदन, और जाति प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों के प्रारूप दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक कामकाज में छत्तीसगढ़ी भाषा के उपयोग को बढ़ावा देना और इसे शासन-प्रशासन में अधिक प्रभावी ढंग से लागू करना है। राजभाषा आयोग ने इस पहल के माध्यम से छत्तीसगढ़ी भाषा को शासन का हिस्सा बनाने और इसे आम जनता के साथ संवाद का माध्यम बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

डॉ चितरंजन कर ने छत्तीसगढ़ी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिलाने और इसके विकास के लिए किए गए प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का गठन भाषाई आधार पर हुआ था और छत्तीसगढ़ी भाषा को राजभाषा के रूप में स्थापित करना हमारी सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का हिस्सा है। डॉ कर ने बताया कि छत्तीसगढ़ी भाषा लोकोक्ति, अहाना, मुहावरे भावों और शब्दों से वृहद और संपन्न है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा का अपना वृहद शब्दकोष है। छत्तीसगढ़ी की यह विशेषता है कि इसमें क्रिया रूप में स्त्रीलिंग और पुर्लिंग एक ही है। इसमें बहुवचन बनाने के लिये एक ही प्रत्यय है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में 36 भाषाएं बोली जाती है। छत्तीसगढ़ राज्य भाषा आयोग प्रदेश की भाषाओं को संगृहीत करने का काम कर रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा को हिंदी का सहोदरा बताया। डॉ. कर ने अधिकारी कर्मचारियों को छत्तीसगढ़ी भाषा का ज्यादा से ज्यादा कार्यालयीन उपयोग करने के लिये प्रेरित किया।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी अधिकारी-कर्मचारियों को छत्तीसगढ़ी भाषा के उपयोग को अपनी दिनचर्या एवं प्रशासनिक कार्यों में बढ़ावा देने हेतु प्रशिक्षण प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।

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