सुकमा, 21 जनवरी 2026/sns/-वनांचल क्षेत्रों में अक्सर छिंद के पेड़ों का उपयोग केवल रस (पेय पदार्थ) के रूप में किया जाता रहा है, जिससे ग्रामीणों को बेहद कम आय प्राप्त होती थी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुकमा जिले के ग्राम सामसेट्टी (विकासखण्ड कोंटा) में एक नई क्रांति की शुरुआत हुई है। “नियद नेल्लानार“ पहल के तहत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान“ के माध्यम से यहाँ की महिलाएं अब छिंद के रस से गुड़ तैयार कर रही हैं, जो उनकी आजीविका के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है।
पारंपरिक खेती से आगेरू कौशल का नया सवेरा
आमतौर पर बस्तर और सुकमा के ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का मुख्य साधन धान की खेती और लघु वनोपज संग्रहण है। चूँकि यहाँ धान की केवल एक ही फसल ली जाती है, वर्ष के बाकी समय ग्रामीणों के पास रोजगार के अवसर सीमित होते थे। कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन और जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर के सहयोग से इस शून्यता को भरने के लिए छिंद गुड़ निर्माण का नवाचार किया गया। ग्राम सामसेटी की दंतेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह की 10 दीदियों ने इस चुनौती को स्वीकार किया और दंतेवाड़ा से आए विशेषज्ञों से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
आर्थिक सशक्तिकरण के मुख्य बिंदु
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की पहल से छिंद गुड़ के उत्पादन से न केवल दीदियों का कौशल बढ़ेगा, बल्कि उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
’ अतिरिक्त आयरू इस गतिविधि से प्रति परिवार औसतन 6000 से 7000 रुपये की अतिरिक्त मासिक आय प्राप्त होगी।
’ उच्च बाजार मूल्यरू छिंद गुड़ की गुणवत्ता और औषधीय गुणों के कारण बाजार में इसकी कीमत लगभग 350 रुपये प्रति किलोग्राम है।
’ संसाधनों का सदुपयोगरू जिन छिंद पेड़ों का उपयोग पहले सीमित था, अब वे आर्थिक उन्नति का केंद्र बन गए हैं।
“नियद नेल्लानार“ की सार्थकता
प्रशासन की यह पहल यह दर्शाती है कि यदि स्थानीय संसाधनों को सही तकनीक और प्रशिक्षण के साथ जोड़ा जाए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदली जा सकती है। सामसेट्टी की इन 10 दीदियों की सफलता को देखते हुए अब गाँव की अन्य महिलाएं भी इस हुनर को सीखने के लिए आगे आ रही हैं, जिनके लिए जल्द ही अगले चरण का प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। छिंद की यह मिठास अब सुकमा के विकास की नई इबारत लिख रही है।

