छत्तीसगढ़

राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित रेबीज के प्रभावी उपचार और प्रबंधन पर स्वास्थ्य कर्मियों को किया गया प्रशिक्षित


रायगढ़, 18 दिसम्बर 2025/sns/- कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देश एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत आज जिले के चिकित्सा अधिकारियों, स्टाफ नर्सों, फार्मासिस्टों एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए रेबीज से बचाव एवं रोकथाम विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के आरोग्यम् सभाकक्ष में आयोजित हुआ। प्रशिक्षण में मेडिकल कॉलेज से डॉ. आनंद मसीह लकड़ा एवं डॉ. जितेन्द्र नायक तथा पुसौर ब्लॉक से डॉ. कलेश्वर राठिया ने मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण प्रदान किया।
मास्टर ट्रेनरों द्वारा बताया गया कि रेबीज (जलांतक) एक शत-प्रतिशत घातक रोग है, किंतु समय पर सही उपचार एवं टीकाकरण से इसकी पूर्णतः रोकथाम संभव है। उन्होंने कुत्ता, बंदर, बिल्ली एवं अन्य जानवरों के काटने के बाद घाव की तत्काल साफ-सफाई, एंटी-रेबीज वैक्सीन तथा इम्यूनोग्लोबुलिन के समय पर उपयोग के महत्व पर विशेष जोर दिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को रेबीज के लक्षण, प्राथमिक उपचार, पोस्ट एक्सपोजर प्रोफाइलेक्सिस, वैक्सीनेशन शेड्यूल, दवाओं का प्रबंधन, केस रिपोर्टिंग, रेफरल प्रणाली एवं डाटा एंट्री से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के परिपालन में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों में एंटी-रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा पशु काटने के मामलों में त्वरित एवं मानक उपचार प्रदान किया जाए। साथ ही अस्पताल परिसरों में फेंसिंग, बाउंड्रीवाल, गेट एवं अन्य आवश्यक प्रशासनिक उपाय कर आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने तथा स्वच्छता गतिविधियों को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कार्यक्रम में जिला नोडल अधिकारी डॉ. केनन डेनियल, डॉ. सुमित शैलेन्द्र कुमार मंडल, एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ.कल्याणी पटेल सहित जिले के विकासखण्ड लोईंग, पुसौर, लैलूंगा, घरघोड़ा, खरसिया, तमनार एवं धरमजयगढ़ के स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहें।
जन-जागरूकता एवं आईईसी गतिविधियाँ
जिले की सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में रेबीज रोकथाम, कुत्ते के काटने पर प्राथमिक उपचार एवं एआरवी की उपलब्धता से संबंधित आईईसी सामग्री (पोस्टर, ऑडियो-विजुअल) प्रदर्शित की जा रही है। आमजन को डॉग बाइट से बचाव हेतु हेल्पलाइन नंबर 1100 तथा अन्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 104 पर संपर्क करने की जानकारी दी गई।

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