छत्तीसगढ़

सड़क सुरक्षा और स्वरोजगाररू एलमागुडा में प्रशासनिक प्रयासों का असर

सुकमा, 17 दिसंबर 2025/sns/-एक समय था जब जिला मुख्यालय सुकमा से 85 किलोमीटर दूर स्थित एलमागुडा गांव विकास से कोसों दूर था। न सड़क थी, न बुनियादी सुविधाएं और भय का माहौल हमेशा बना रहता था। लेकिन आज यही गांव विकास, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनता जा रहा है। कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव के कुशल निर्देशन एवं जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में शासन की योजनाएं अब अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं। इसका जीवंत उदाहरण हैं ग्राम पंचायत एलमागुडा के निवासी सोड़ी सोमनाथ।
आदिवासी परिवार से ताल्लुक रखने वाले सोड़ी सोमनाथ की आजीविका पहले केवल कृषि, तेंदूपत्ता तोड़ने और महुआ संग्रह तक सीमित थी। सीमित आमदनी में परिवार का पालन-पोषण और बच्चों की शिक्षा एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन महात्मा गांधी नरेगा योजना ने उनके जीवन में बदलाव की नई राह खोल दी। वित्तीय वर्ष 2024-25 में सोड़ी सोमनाथ द्वारा नरेगा अंतर्गत डबरी निर्माण की मांग की गई, जिसे पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई। डबरी निर्माण के लिए उन्हें 2 लाख 99 हजार 465 रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। आज डबरी का निर्माण पूर्ण हो चुका है और सोमनाथ उसमें मछली पालन कर रहे हैं। डबरी से प्राप्त मछली को वे स्थानीय बाजारों के साथ-साथ सुरक्षा कैम्प में भी बेच रहे हैं, जिससे उन्हें नियमित और अतिरिक्त आमदनी हो रही है। अब उनका परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है और बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो रहा है।
सोड़ी सोमनाथ कहते हैं कि पहले केवल धान बेचकर परिवार चलाना मुश्किल था। आज डबरी में मछलीपालन से होने वाली आमदनी से मैं अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला पा रहा हूं। अब वे जंगल में कुल्हाड़ी नहीं, बल्कि किताब उठाएंगे और अपने गांव और समाज के विकास में अपना योगदान देंगे।”
गांव में सड़क निर्माण और सुरक्षा कैम्प की स्थापना से भय का माहौल समाप्त हुआ है और गांव के सर्वांगीण विकास की गति तेज हुई है। सोमनाथ की सफलता को देखकर अब गांव के अन्य लोग भी नरेगा के तहत डबरी निर्माण की मांग कर रहे हैं।

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