सुकमा, 08 दिसंबर 2025/sns/-जिले में मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का तेरहवां चरण आज से औपचारिक रूप से शुरू हो गया। इसी क्रम में अति संवेदनशील क्षेत्रों के मितानिनों को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आरके सिंह द्वारा मलेरिया जांच, अलक्षित मरीजों की पहचान और समुचित उपचार के संबंध में विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
साथ ही जिले में कोम्बेक्ट टीम का गठन किया गया है, जो किसी ग्राम में 5 से अधिक मलेरिया मरीज मिलने या गंभीर मरीज की पहचान होने पर तुरंत उस ग्राम में शिविर लगाकर जांच एवं उपचार सुनिश्चित करेगी।
अभियान के लिए सूक्ष्म कार्ययोजना तैयार कर ली गई है, जिसके अनुसार कुल 3,00,256 व्यक्तियों की मलेरिया जांच की जाएगी।
अभियान के दौरान एएनएम, आरएचओ, सीएचओ, एमटी एवं संबंधित ग्रामों के मितानिनों द्वारा घर-घर पहुँचकर लोगों की शत प्रतिशत मलेरिया जांच की जाएगी। यदि किसी परिवार का सदस्य प्रथम बार अनुपस्थित मिलता है, तो टीम पुनः भ्रमण कर उसकी जांच अनिवार्य रूप से करेगी।
जिले के 15,587 आश्रम-हॉस्टल और पोटा केबिन के बच्चे तथा 9,037 सुरक्षा बल के जवानों की भी मलेरिया जांच की जाएगी। इसी प्रकार जगरगुंडा, केरलापाल, पोंगाभेजी, मनकापाल, गोंडेरास, डब्बा, कुन्ना, पुसपाल और चितलनार जैसे अति संवेदनशील क्षेत्रों में दल रात में उसी ग्राम में ठहरकर मरीजों को दूसरे और तीसरे दिन की दवा अपने सामने सेवन करवाएंगे, तत्पश्चात अगले ग्राम के सर्वे के लिए प्रस्थान करेंगे।
मलेरिया पॉजिटिव पाए गए व्यक्तियों को दवा अवधि पूर्ण होने पर पुनः रक्त-पट्टी से परीक्षण किया जाएगा। यदि दोबारा परजीवी पाए जाते हैं तो उम्रानुसार पुनः उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने डॉ आरके सिंह कहा कि हमारा लक्ष्य सुकमा जिले के प्रत्येक घर और प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचना है। यह चरण हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मलेरिया उन्मूलन की दिशा में निर्णायक साबित होगा। सभी दलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी परिवार और कोई भी व्यक्ति जांच से वंचित न रहे। सामुदायिक सहयोग के साथ हम सुकमा को पूरी तरह मलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने सभी जिलेवासियों से मलेरिया मुक्त सुकमा बनाने में सहयोग की अपील की।

