सुकमा, 02 सितम्बर 2025/sns/- जिले के किसानों के लिए चिंताजनक स्थिति पैदा हो सकती है, क्योंकि धान की फसलों पर जीवाणु जनित झुलसा रोग (बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट) का खतरा बढ़ रहा है। इस संदर्भ में कृषि विज्ञान केन्द्र सुकमा के पौध रोग वैज्ञानिक राजेन्द्र प्रसाद कश्यप एवं कीट वैज्ञानिक डॉ. योगेश कुमार सिदार ने किसानों को आवश्यक जानकारी दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह रोग धान की फसल में रोपाई या बुवाई के 20 से 25 दिन बाद दिखाई देता है और पौधे की छोटी अवस्था से लेकर परिपक्व अवस्था तक कभी भी हमला कर सकता है। शुरुआत में पत्तियों के किनारे पीले पड़ जाते हैं, बाद में पत्तियां नोंक से सूखकर झुलसी हुई नजर आने लगती हैं। संक्रमित पत्तियों पर राख के रंग के चकत्ते भी दिखते हैं। अगर संक्रमण अधिक हो जाए तो पूरी पत्तियां सूख जाती हैं, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं, उनमें कंसे कम निकलते हैं और दाने अधूरे भरते हैं, नतीजतन पैदावार घट जाती है। फसल में किसी भी प्रकार के रोग की संभावना होने पर क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी को जानकारी दें।
रोग नियंत्रण के लिए वैज्ञानिकों ने किसानों को निम्नलिखित सुझाव दिए हैं खेतों को खरपतवार मुक्त रखें और पुराने फसल अवशेष नष्ट करें। प्रमाणित बीजों का चयन कर समय पर बुवाई करें। रोग प्रतिरोधी किस्में लगाएँ और संतुलित मात्रा में खाद-पोषक तत्वों का उपयोग करें। रोग की स्थिति में खेत से अतिरिक्त पानी निकाल दें, 3-4 दिन तक खेत खुला रखें और 25 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। किसी भी रासायनिक दवा का प्रयोग न करें और आवश्यकता पड़ने पर कृषि विज्ञान केन्द्र या कृषि विभाग से संपर्क करें।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि फसल में किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही न करें और तुरंत ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी और कृषि वैज्ञानिकों से मार्गदर्शन लें, ताकि फसल उत्पादन पर गंभीर असर न पड़े।


