छत्तीसगढ़

मांदर में जनजीवन सामान्य होने की ओर ग्रामीणों ने कहा शासन-प्रशासन से मिल रही हर संभव मदद


जगदलपुर, 29 अगस्त 2025/sns/- जिले में विगत सोमवार एवं मंगलवार को हुई अतिवृष्टि से लोहण्डीगुड़ा ब्लॉक के मांदर में आयी बाढ़ के बाद अब जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। भारी बारिश और नदी-नाले में आए उफान के कारण हुए नुकसान के बाद अब पानी पूरी तरह उतर चुका है और लोग अपने घरों को लौट रहे हैं। साथ ही जनजीवन सामान्य होने लगा है और यहां के ग्रामीणों ने बताया कि शासन-प्रशासन द्वारा प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद दी जा रही है। ग्रामीणों ने अब मांदर नाले के  किनारे से बसाहट को अन्यत्र हटाकर बसाने के लिए एकजुट होकर विचार करने का निर्णय लिया है। जिला प्रशासन द्वारा मांदर में पांच अलग-अलग राहत शिविरों में 250 से ज्यादा प्रभावितों को नाश्ता-चाय एवं भोजन की उपलब्धता सहित चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराया जा रहा है। इन ग्रामीणों को नाश्ता-चाय एवं भोजन के लिए राशन एवं अन्य जरूरी सामग्री दी जा रही है, जिससे  प्रभावित ग्रामीण स्वयं नाश्ता एवं भोजन तैयार कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा गांव के सभी परिवारों को आवश्यकता के अनुरूप कम्बल, चादर और साड़ी, लुंगी-बनियान और बच्चों के कपड़े प्रदान किया गया है। शासन-प्रशासन इन बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास एवं अन्य सहायता के लिए पूरी मुस्तैदी से जुटा है। वहीं कई गैर-सरकारी संगठनों के द्वारा राहत और पुनर्वास कार्य में सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
          स्थानीय प्रभावित ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन द्वारा किए जा रहे राहत सेवाओं के प्रति संतुष्टि व्यक्त करते हुए कहा कि सहायता और राहत कार्यों पर अब ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। ग्रामीणों को मकान बनाने के लिए सहायता प्रदान करने सहित आवश्यक बांस-बल्ली उपलब्ध करवाया जा रहा है। वहीं बिजली आपूर्ति के लिए विद्युत लाइन का सुधार किया गया है। रैनु पटेल ने बताया कि राहत शिविर में समय पर भोजन और रहने की जगह मिली है। यहां सभी व्यवस्था पर्याप्त है, सभी के लिए राशन सुलभ कराया जा रहा है और भोजन हम खुद बना रहे हैं। चिकित्सा शिविर में स्वास्थ्य जांच के साथ उपचार भी किया जा रहा है। जिसमें बच्चों को प्राथमिकता दी जा रही है। रैनु ने बताया कि तीन सदस्यीय परिवार के लिए कम्बल, चादर, लुंगी-बनियान सहित बच्चों को कपड़े दिए गए हैं। इस दौरान झुमुकलाल पटेल ने बताया कि उसका मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है और ढाई एकड़ धान के खेत में से आधा एकड़ धान बाढ़ के रेत से पट गया है। उसने राहत शिविर की व्यवस्था को पर्याप्त निरूपित करते हुए आवश्यक कपड़े देने की बात कही। वहीं सुखराम पोयामी ने मकान को पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त होने की जानकारी देते हुए राहत शिविर में भोजन एवं अन्य व्यवस्था के प्रति संतुष्टि जताई। इस दौरान जिला प्रशासन द्वारा अब तक गांव के आंशिक तौर पर क्षतिग्रस्त मकानों के 14 प्रभावितों को 91 हजार रूपए तथा पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त 4 मकानों के पीड़ितों को 4 लाख 80 हजार रूपए आर्थिक सहायता प्रदान किया गया है। वहीं प्रभावितों को मकान निर्माण एवं मरम्मत के लिए वन विभाग के माध्यम से बांस एवं बल्ली उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही सर्वेक्षण के आधार पर प्रभावितों को आर्थिक सहायता प्रदान किया जा रहा है। साथ ही मांदर एवं पारापुर के प्रभावितों के लिए 60 क्विंटल चांवल उचित मूल्य दुकान में भंडारित किया गया है।

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