सुकमा, 26 अगस्त 2025/sns/- कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव के मार्गदर्शन में जिले में 16 से 22 अगस्त 2025 तक गाजर घास उन्मूलन जागरूकता सप्ताह का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र, सुकमा द्वारा किया गया। इस दौरान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों, ग्रामीणों, महिलाओं और बच्चों को गाजर घास के दुष्प्रभावों व इसके उन्मूलन के उपायों की सचित्र जानकारी दी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम मुरतोंडा के स्कूल मुयापारा व कानकीपारा के बच्चों और मुयापारा की महिलाओं के साथ-साथ कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में भी सामूहिक रूप से गाजर घास उखाड़कर नष्ट किया गया।
गाजर घास के दुष्प्रभाव
कार्यक्रम में बताया गया कि गाजर घास त्वचा रोग, एलर्जी, दमा और कृषि भूमि की उर्वरता पर गंभीर असर डालती है। यह न केवल फसलों की उपज घटाती है, बल्कि पशुओं के लिए भी विषैली सिद्ध होती है। गर्भवती पशुओं में यह गर्भपात का कारण तक बन सकती है।
वैज्ञानिकों की सलाह
केंद्र के कीट वैज्ञानिक डॉ. योगेश कुमार सिदार ने जैविक नियंत्रण की जानकारी देते हुए कहा कि मैक्सिकन बीटल गाजर घास नियंत्रण का प्रभावी साधन है। उन्होंने सामुदायिक स्तर पर इसे उखाड़कर नष्ट करने, कम्पोस्ट बनाने और वैकल्पिक उपयोग अपनाने पर बल दिया।
सामुदायिक भागीदारी
ग्रामवासियों और स्कूल बच्चों ने सामूहिक रूप से गाजर घास उखाड़कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कृषि विज्ञान केंद्र ने लोगों से अपील की कि वे अपने खेत, आंगन और सार्वजनिक स्थलों पर इस हानिकारक खरपतवार को न पनपने दें।
जनजागरूकता अभियान के दौरान केंद्र से प्रक्षेत्र प्रबंधक श्रीमती मयूरी ठाकुर, गुलशन वर्मा, ज्योतिष पोटला तथा नंदा उपस्थित रहे।




