छत्तीसगढ़

संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में ‘आधुनिक समय में भारत बोध’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला संपन्न

अम्बिकापुर 23 मार्च 2026/sns/-  संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, अम्बिकापुर के शिक्षण विभाग में “आधुनिक समय में भारत बोध” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. डॉ. राजेंद्र लाकपाले ने अतिथियों का स्वागत करते हुए भारत की प्राचीन एवं निरंतर विकसित हो रही वैज्ञानिक परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से भारत की समृद्ध वैज्ञानिक विरासत को गंभीरता से समझने एवं आत्मसात करने का आवाहन किया। इस अवसर पर पूर्व आईजी एवं प्रज्ञा प्रवाह की प्रांतीय कार्यकारिणी के सदस्य श्री सुशील द्विवेदी ने छात्रों को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भारतीय सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत से अवगत कराया।

कार्यशाला के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित अखिल भारतीय संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह श्री विनय दीक्षित ने अपने उद्बोधन में भारत की विभिन्न अवधारणाओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि “जो भाव से रत है, वही भारत है।” उन्होंने भारत को भावों एवं संबंधों का देश बताते हुए कहा कि भारत सदैव सत्य का साधक रहा है। श्री दीक्षित ने धर्म की व्याख्या करते हुए राजा शिवि की कथा के माध्यम से कर्तव्य पालन को ही वास्तविक धर्म बताया। उन्होंने “वसुधैव कुटुम्बकम्” को भारत का मूल मंत्र बताते हुए कोविड-19 काल में भारत द्वारा विश्व को वैक्सीन उपलब्ध कराए जाने को इसका जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से भारत बोध को आत्मसात करने तथा उत्तम पुस्तकों के अध्ययन की आदत विकसित करने का आग्रह किया।
कार्यशाला के समापन अवसर पर कुलसचिव डॉ. शारदा प्रसाद त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए विद्यार्थियों से सत्य एवं असत्य में अंतर समझने की प्रज्ञा विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय महापुरुषों का मूल्यांकन पश्चिमी दृष्टिकोण से नहीं किया जाना चाहिए।कार्यक्रम का संयोजन एवं मंच संचालन डॉ. समन नारायण उपाध्याय द्वारा किया गया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में शिक्षक एवं छात्र उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *