कवर्धा, 30 सितंबर 2025/sns/-कृषि विज्ञान केन्द्र कवर्धा में 23 से 29 सितंबर 2025 तक सात दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि वनमंडलाधिकारी श्री निखिल अग्रवाल शामिल हुए। प्रशिक्षण में कबीरधाम जिले के विभिन्न गांवों से चयनित 25 कृषकों ने भाग लिया, जिनमें ग्राम नाउडीह, पड़कीकला, महली, खरहट्टा, जमुनिया, नेवारी, मगरवाड़ा, रापा, मोटियारी, मोतिमपुर, कवर्धा, सारंगपुर एवं सिल्हाटी के कृषक सम्मिलित थे। मुख्य अतिथि द्वारा सभी 25 प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं। मुख्य अतिथि श्री अग्रवाल ने कृषि विज्ञान केन्द्र कवर्धा के प्रक्षेत्र का भी अवलोकन किया तथा केन्द्र की गतिविधियों की सराहना करते हुए वैज्ञानिकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
प्रशिक्षण के दौरान राज्य के विभिन्न कृषि विज्ञान केन्द्रों से आए वैज्ञानिकों ने मधुमक्खी पालन से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी। इसमें मधुमक्खियों के प्रकार, फूल प्रबंधन एवं रख-रखाव, उपकरणों का उपयोग, स्थान का चयन, शहद निष्कर्षण की विधि, बाजार की मांग, विक्रय एवं पैकेजिंग जैसे विषय शामिल रहे। साथ ही प्रशिक्षणार्थियों को कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया। कृषकों को बताया गया कि मधुमक्खियां फसलों के परागण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे फल, सब्जी एवं दलहनी फसलों की पैदावार बढ़ती है और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है। इसके अलावा, मधुमक्खियों द्वारा उत्पादित शहद पौष्टिक एवं औषधीय गुणों से भरपूर होता है, वहीं मधुमक्खी से प्राप्त मोम का उपयोग सौंदर्य प्रसाधन, पॉलिशिंग एवं औषधि उद्योग में किया जाता है। विशेषज्ञों ने बताया कि मधुमक्खी पालन एक कम खर्चीला एवं लाभकारी व्यवसाय है, जो विशेष रूप से महिलाओं एवं भूमिहीन कृषकों के लिए अतिरिक्त आय एवं स्वरोजगार का साधन बन सकता है। इस अवसर पर उपवनमंडलाधिकारी श्री अभिनव केशरवानी, कृषि विज्ञान केन्द्र, कवर्धा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.पी. त्रिपाठी, प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. एन.सी. बंजारा, विषय वस्तु विशेषज्ञ इंजीनियर टी.एस. सोनवानी, डॉ. बी.एस. परिहार, डॉ. छत्रपाल रहांगडाले एवं अन्य वैज्ञानिकगण उपस्थित रहे।

