कवर्धा, 11 जुलाई 2025। पर्यावरण की गुणवत्ता में गिरावट, बढ़ते प्रदूषण और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता ने आज के समय में हरित ऊर्जा की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। ऐसे दौर में केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना न केवल नागरिकों को ऊर्जा आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ी पहल सिद्ध हो रही है। इस योजना के माध्यम से आम लोग सौर ऊर्जा को अपनाकर न सिर्फ अपने बिजली खर्च को शून्य कर रहे हैं, बल्कि स्वच्छ, हरित और टिकाऊ भविष्य की नींव भी रख रहे हैं। इसी योजना का लाभ उठाकर कवर्धा नगर के वार्ड क्रमांक 03 निवासी श्री ओंकार साहू ने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किया है। ओंकार साहू बताते हैं कि पहले उनके घर का बिजली बिल हर महीने 1200 से 1500 रुपये तक आता था, लेकिन अब यह पूरी तरह शून्य हो गया है। यह परिवर्तन उनके परिवार के आर्थिक जीवन में बड़ी राहत बनकर आया है। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत उन्हें केंद्र सरकार से 78,000 रुपये और छत्तीसगढ़ शासन से 30,000 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी प्राप्त हुई, जिससे कुल 1 लाख 8 हजार रुपये की वित्तीय सहायता मिली। इस अनुदान से सौर संयंत्र की स्थापना लागत लगभग 50 प्रतिशत तक घट गई। सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यह सब्सिडी सीधे उनके खाते में स्थानांतरित की गई, जिससे योजना की प्रक्रिया सहज, पारदर्शी और भरोसेमंद बनी रही। श्री ओंकार साहू अपने माता-पिता, पत्नी सरस्वती साहू, बच्चों और बहन के साथ मिलकर एक आदर्श पारिवारिक जीवन जी रहे हैं। उनका परिवार छत्तीसगढ़ शासन की कई जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले रहा है। श्री साहू ने बताया कि बिजली उत्पादन में कोयला जैसे पारंपरिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग हो रहा है, जो सीमित और प्रदूषणकारी हैं। ऐसे में सूर्य जैसा अक्षय और स्वच्छ ऊर्जा स्रोत सबसे भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है। इससे वातावरण को भी कोई नुकसान नहीं होता। यह एक ऐसा विकल्प है, जो वर्तमान की जरूरत और भविष्य की ज़िम्मेदारी दोनों को एक साथ पूरा करता है। श्री ओंकार साहू का मानना है कि सरकार की इस योजना ने आम नागरिकों के लिए सौर ऊर्जा को सुलभ और सरल बना दिया है। बिना किसी दौड़भाग के यह सुविधा मिल जाती है और आवेदन की प्रक्रिया भी बेहद आसान है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से ओंकार साहू ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो हर व्यक्ति न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो सकता है, बल्कि पर्यावरण की रक्षा में भी सक्रिय भूमिका निभा सकता है। उनकी यह सफलता कहानी आज के युवाओं, गृहस्वामियों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
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