छत्तीसगढ़

महतारी वंदन योजना से संवर रहे शकीला के सपने

अम्बिकापुर, 10 मार्च 2026/sns/-  छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी ’महतारी वंदन योजना’ प्रदेश की लाखों महिलाओं के जीवन में न केवल आर्थिक संबल लाया है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई उड़ान दिया है। अम्बिकापुर के मुक्ति पारा के मदर टेरेसा वार्ड, वार्ड क्रमांक 4 की निवासी शकीला बानो इसका जीवंत उदाहरण हैं।

शकीला बानो सिलाई का काम जानती थीं, लेकिन स्वयं की मशीन न होने के कारण उन्हें काम करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महतारी वंदन योजना की शुरुआत हुई, तो शकीला ने इस अवसर को अपनी आत्मनिर्भरता का जरिया बनाया।

आर्थिक आजादी की ओर बढ़ते कदम
शकीला बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली 1,000 रुपये की मासिक राशि का उन्होंने सदुपयोग किया। उन्होंने किश्तों पर एक सिलाई मशीन खरीदी और योजना से मिलने वाली राशि से उसकी किश्तें जमा कीं। शकीला बतातीं हैं कि, मशीन की किश्त अब पूरी होने वाली है। अब सिलाई से जो भी आमदनी होती है, उसका उपयोग अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में कर पा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना से मुझ जैसी कई महिलाओं के लिए एक स्थाई सहारा आर्थिक सहारा मिला है।

शासन की योजना से मिला संबल
शकीला ने अपनी सफलता का श्रेय शासन की योजना के साथ-साथ महिला एवं बाल विकास विभाग और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर महिलाओं को ढूंढा, उन्हें योजना की जानकारी दी और फॉर्म भरवाने में पूरी मदद की। उन्हीं के प्रयासों से आज घर बैठे महिलाओं को राशि प्राप्त हो रही है।

महतारी वंदन योजना से मिला आर्थिक संबल
शकीला बानो ने महतारी वंदन योजना के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि,1000 रुपये की राशि भले ही देखने में छोटी लगे, लेकिन एक महिला के लिए यह बहुत बड़ा मानसिक और आर्थिक संबल है। अब महिलाएं इस बात के लिए आश्वस्त रहती हैं कि उनके पास अपनी जरूरतों के लिए एक निश्चित और स्थायी राशि उपलब्ध है।

शासन की इस पहल ने प्रदेश की लाखों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव की नींव रखी है। शकीला बानो जैसी कई महिलाएं इस राशि का उपयोग छोटे व्यवसाय, घरेलू जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई में कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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