छत्तीसगढ़

सशक्त महिला, समर्थ समाजः जेंडर मास्टर ट्रेनर ज्योति गुप्ता बनीं पीड़ित महिलाओं की संबल

अम्बिकापुर, 09 मार्च 2026/sns/-  ग्रामीण अंचलों में महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और घरेलू हिंसा के विरुद्ध खड़ा करने में जेंडर मास्टर ट्रेनर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसी कड़ी में अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत सुंदरपुर की रहने वाली श्रीमती ज्योति गुप्ता महिलाओं के लिए एक ’संकटमोचक’ के रूप में हिंसा पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने और उन्हें मानसिक दबाव से बाहर निकालने का कार्य कर रही हैं।

संवाद और सहेली का भावः कार्य करने की अनूठी शैली

पेशे से जेंडर मास्टर ट्रेनर ज्योति गुप्ता का मानना है कि महिलाएं अक्सर सामाजिक दबाव के कारण अपनी पीड़ा साझा नहीं कर पातीं। वे बताती हैं कि महिलाओं को जागरूक करने के लिए वे ग्राम संगठन  (VO) और स्वयं सहायता समूह (SHG)की बैठकों में शामिल होती हैं। ज्योति की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता ’दोस्ती और विश्वास’ है। वे पहले महिलाओं से आत्मीय संबंध बनाती हैं, जिससे महिलाएं सहज होकर अपने जीवन की चुनौतियों और घरेलू समस्याओं पर खुलकर बात कर सकें।

चरणबद्ध समाधान प्रक्रियाः ’सखी’ से ’कोर्ट’ तक का साथ
ज्योति गुप्ता न केवल समस्याओं को सुनती हैं, बल्कि उनका व्यवस्थित समाधान भी सुनिश्चित करती हैं, प्रारंभिक स्तर के विवादों को वे स्वयं आपसी समझाइश से सुलझाने का प्रयास करती हैं। जटिल मामलों को लखनपुर स्थित जेंडर रिसोर्स सेंटर में रेफर किया जाता है। गंभीर प्रकरणों में अम्बिकापुर स्थित सखी सेंटर के माध्यम से पेशेवर काउंसलिंग और आश्रय की सहायता ली जाती है। यदि मामला सुलझ नहीं पाता, तो पुलिस प्रशासन और न्यायालय के माध्यम से पीड़ित महिला को विधिक सहायता दिलाकर न्याय सुनिश्चित किया जाता है।

गोपनीयता ही सबसे बड़ी ताकत
ज्योति गुप्ता बताती हैं कि इस कार्य की पहली शर्त ’गोपनीयता’ है। ग्रामीण परिवेश में अक्सर महिलाएं इस डर से बात नहीं करतीं कि समाज को पता चल जाएगा। ज्योति ने दीदियों के बीच यह विश्वास कायम किया है कि उनकी बातें केवल उन तक ही सीमित रहेंगी। इसी गोपनीयता के कारण आज महिलाएं विवाहेत्तर संबंधों और घरेलू हिंसा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी उनसे बेझिझक चर्चा करती हैं।

ज्योति गुप्ता की उपलब्धियां और विजन

अब तक ज्योति गुप्ता ने लगभग 40 से अधिक मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया है, जबकि 5 से 7 मामले वर्तमान में प्रक्रियाधीन हैं। उनका मुख्य उद्देश्य एक भयमुक्त समाज की स्थापना करना है, जहाँ हर महिला अपने अधिकारों के प्रति सजग हो और गरिमापूर्ण जीवन जी सके। आज उनके प्रयासों से सुंदरपुर और आसपास के क्षेत्रों की महिलाएं जागरूक होकर अपनी तकलीफें साझा कर रही हैं और मुख्यधारा से जुड़ रही हैं।

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