छत्तीसगढ़

बस्तर पण्डुम के समापन पर गूंजी आदिम संस्कृति की थाप

जगदलपुर, 09 फरवरी 2026/sns/- बस्तर की लोक संस्कृति और परंपराओं के महापर्व बस्तर पण्डुम के संभाग स्तरीय कार्यक्रम के समापन समारोह में कोंडागांव जिले के केशकाल विकासखंड स्थित ग्राम कलेपाल के ग्रामीणों ने अविस्मरणीय प्रस्तुति दी। इस अवसर पर ग्रामीणों ने अपने पारंपरिक जनजातीय वाद्य यंत्रों का ऐसा जादुई प्रदर्शन किया कि वहां मौजूद हर अतिथि मंत्रमुग्ध हो गया। कलेपाल के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के जरिए न केवल अतिथियों का मन मोहा, बल्कि बस्तर की लुप्त होती दुर्लभ सांगीतिक विरासत को भी मंच पर जीवंत कर दिया।
समारोह में उत्साह तब चरम पर पहुंच गया जब वाद्य यंत्रों की एक लंबी श्रृंखला एक सुर में गूंज उठी। कलाकारों ने मांदर, ढोल और निशान की गंभीर थाप के साथ कोतोडका, गुटाफरा और नरी फरा जैसे पारंपरिक यंत्रों को बजाना शुरू किया, जिससे वातावरण में एक अद्भुत ऊर्जा का संचार हो गया। प्रदर्शन के दौरान गुल्पी फरा, नंगोरा, कुंदीड़ और दुबरा की ध्वनियों ने जहां समां बांधा, वहीं सुलुड़, मोहिर, तमोरा और डोमिर की जुगलबंदी ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस सांस्कृतिक प्रवाह में टुसिर, पैजाना, मोईयंग, चेहरे और कचते जैसे अत्यंत दुर्लभ साजों का शामिल होना यह बताने के लिए काफी था कि बस्तर के वनवासी अपनी विरासत को कितनी शिद्दत से सहेजे हुए हैं।
इन वाद्य यंत्रों से निकली धुनों ने आधुनिकता के शोर के बीच अपनी माटी की सौंधी महक का अहसास कराया। अतिथियों ने इस प्रदर्शन की भूरी-भूरी प्रशंसा की और इसे बस्तर की कला का अद्भुत नमूना बताया। कलेपाल के ग्रामीणों द्वारा किया गया यह प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि बस्तर की सांस्कृतिक जड़ें आज भी उतनी ही गहरी और मजबूत हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *