छत्तीसगढ़

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम

सुकमा, 5 फरवरी 2026/sns/-कृषि विज्ञान केंद्र, सुकमा एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आत्मसमर्पित प्रशिक्षणार्थियों के लिए प्राकृतिक खेती पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसी क्रम में आज 5 फरवरी 2026 को प्रशिक्षणार्थियों को प्राकृतिक खेती की अवधारणा, उसके लाभ एवं महत्व के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 4 फरवरी 2026 से 27 फरवरी 2026 तक कुल 12 कार्य दिवसों में आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान प्राकृतिक खेती को कम लागत, टिकाऊ, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धति के रूप में अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के स्थान पर स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर कैसे बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक खेती के नोडल अधिकारी डॉ. योगेश कुमार सिदार ने गोबर एवं गौमूत्र से जीवामृत, बीजामृत एवं नीमास्त्र तैयार करने की विधि का जीवंत प्रदर्शन किया। साथ ही उन्होंने इन जैविक घोलों के फसलों में उपयोग की प्रक्रिया को व्यवहारिक रूप से समझाया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विभाग से सहायक संचालक कृषि श्री भीम जायसवाल, वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी श्री सुरेश कुमार बैंक, श्री एल.एम. बघेल एवं सुश्री ज्योति गावड़े उपस्थित रहे। वहीं कृषि विज्ञान केंद्र से वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख श्री एच.एस. तोमर, कृषि वैज्ञानिक श्री राजेन्द्र प्रसाद कश्यप, डॉ. संजय सिंह राठौर, ज्योतिष पोटला, संगीता एवं कुंदन ने सहभागिता की।

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