छत्तीसगढ़

नियद नेल्ला नार योजना से बदली पालनार की तस्वीरउप स्वास्थ्य केंद्र (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) का शुभारंभ, 3605 ग्रामीणों को मिलेगी सुलभ स्वास्थ्य सुविधा


बीजापुर, 28 जनवरी 2026/sns/-नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत बीजापुर जिले के ग्राम पालनार में आज उप स्वास्थ्य केंद्र (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस उप स्वास्थ्य केंद्र के प्रारंभ होने से पालनार सहित आसपास के सांवनार, तोड़का, कोरचोली एवं नेंड्रा गाँवों के लगभग 3605 ग्रामीणों को घर के पास ही प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
बीजापुर जिले का यह क्षेत्र अत्यंत नक्सल प्रभावित एवं दुर्गम होने के कारण अब तक बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहा है। ग्रामीणों को इलाज के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता था, जिससे समय, धन और स्वास्थ्यकृतीनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से जिला प्रशासन द्वारा लगातार मूलभूत सुविधाओं के विस्तार एवं आवश्यक अधोसंरचना निर्माण का कार्य किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है।
नव-स्थापित उप स्वास्थ्य केंद्र में मलेरिया, डायरिया जैसी सामान्य बीमारियों का उपचार, टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की जांच एवं देखभाल, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएं तथा निशुल्क दवाइयों का वितरण किया जाएगा। साथ ही आयुष्मान आरोग्य मंदिर में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा नियमित रूप से स्वास्थ्य शिविर एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे समय पर जांच और परामर्श सुनिश्चित हो सके।
शुभारंभ अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री सोनू पोटाम, उपाध्यक्ष श्री दिनेश पुजारी, वरिष्ठ नागरिक श्री घासीराम नाग, श्री संजय लुंकड़, एसडीएम बीजापुर श्री जागेश्वर कौशल, सीएमएचओ डॉ. बी. आर. पुजारी, तहसीलदार गंगालूर श्री बी. के. डहरिया, एसी सीआरपीएफ कोरचोली, डीपीएम बीजापुर श्री वरुण साहू, श्रीमती कल्पना रथ (सीडीपीओ), बीएमओ डॉ. विकास गवेल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम उपस्थित रही। उपस्थित अतिथियों ने स्वास्थ्य केंद्र की सुविधाओं का अवलोकन कर शासन की इस पहल की सराहना की।
ग्रामीणों ने उप स्वास्थ्य केंद्र खुलने पर खुशी व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र के लिए एक बड़ी सौगात बताया। नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत शुरू की गई यह पहल निश्चित रूप से दूरस्थ क्षेत्रों में सुलभ, सशक्त और समावेशी स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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