छत्तीसगढ़

आजीविका डबरी, छोटे किसानों की आत्मनिर्भरता की नई राहमेहनत ने लिखी सफलता की कहानी, रेन धर राणा को मछली पालन से 50,000 की आमदनी


बीजापुर, 01 जनवरी 2026/sns/-जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन को नई दिशा देने के उद्देश्य से महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत आजीविका डबरी निर्माण कार्यों को प्राथमिकता से स्वीकृत किया जा रहा है। जिला प्रशासन की पहल पर लगभग 1000 आजीविका डबरी स्वीकृत किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्ष 2025-26 में कुल 9 करोड़ 75 लाख  रुपए की लागत से 431 आजीविका डबरी स्वीकृत की जा चुकी हैं।
इन डबरियों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा का विस्तार हो रहा है साथ ही जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन को भी बढ़ावा मिला है। इससे किसानों को विभिन्न आजीविका गतिविधियों जैसे -सिंचाई, बागवानी एवं मत्स्य पालन के माध्यम से अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी प्राप्त हो रहा है।

मेहनत ने लिखी सफलता की कहानी-  ग्राम पंचायत गंगालूर के किसान श्री रैनधर राणा ने आजीविका डबरी का उपयोग कर प्रेरणादायक मिसाल प्रस्तुत की है। उन्होंने अपनी डबरी में मत्स्य पालन कर लगभग 50 हजार रुपए की अतिरिक्त आय अर्जित की है। साथ ही 1 एकड़ कृषि भूमि में लगभग 25 नग मिश्रित फलदार पौधों का रोपण किया है, जिनमें आम एवं अमरूद प्रमुख हैं।
तकनीकी सहायक श्री तोरण लाल उर्वशा ने बताया कि श्री रैनधर राणा द्वारा वर्ष 2021-22 में 1 लाख 60 हजार रुपए की लागत से निर्मित यह डबरी उनकी आय वृद्धि और आत्मनिर्भरता का प्रमुख आधार बन चुकी है। उक्त डबरी 20 मीटर लंबाई ग 20 मीटर चौड़ाई एवं 2.5 मीटर गहराई मापदंड से बनाई गई है। वर्तमान में मत्स्य पालन एवं आजीविका संवर्धन को ध्यान में रखते हुए 3 मीटर गहराई से डबरी निर्माण किए जा रहे हैं।
रोजगार सहायक श्री प्रताप सेमल ने बताया कि इस कार्य में कुल 800 मानव दिवस सृजित हुए। महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत निर्मित आजीविका डबरियां ग्रामीण किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने एवं सतत कृषि को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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