छत्तीसगढ़

मनरेगा कुएँ के जल से बनी पीएम आवास की ईंटें

बीजापुर, 31 दिसंबर 2025/sns/- जनपद पंचायत भैरमगढ़ की ग्राम पंचायत रानीबोदली के निवासी श्री सोमड़ू ऑडी, महात्मा गांधी नरेगा योजना के ऐसे हितग्राही हैं, जिनकी जीवन यात्रा सरकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन की सशक्त मिसाल प्रस्तुत करती है।
श्री सोमड़ू ऑडी एक छोटे किसान हैं, सीमित कृषि भूमि और सिंचाई सुविधा के अभाव में वे वर्षों तक केवल पारंपरिक खेती कर पाते थे। वर्षा पर निर्भर खेती के कारण वे एकमात्र धान की फसल तक सीमित थे, जिससे आय बहुत कम होती थी और परिवार की आवश्यकताएँ पूरी करना कठिन था।
मनरेगा से बदली किस्मत- फिर महात्मा गांधी नरेगा योजना अंतर्गत उनके खेत में कुएँ का निर्माण स्वीकृत हुआ। लगभग 3 लाख रुपये की लागत से कुएँ का निर्माण पूर्ण किया गया। इस कार्य से गांव के 13 जॉब कार्डधारी परिवारों के 42 श्रमिकों को 645 मानव दिवस का रोजगार भी प्राप्त हुआ।
सिंचाई से आय के नए रास्ते- कुएँ के निर्माण के बाद श्री सोमड़ू ऑडी के लगभग 2 एकड़ खेत में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो गई। इसके परिणामस्वरूप उन्होंने धान की फसल के बाद सब्जी उत्पादन शुरू किया। इससे एक ओर उनके परिवार को पोषक हरी सब्जियाँ उपलब्ध हुईं वहीं अतिरिक्त सब्जियों के विक्रय से उन्हें लगभग 10 हजार रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई।
कुएँ के पानी से बना पक्का घर- श्री सोमड़ू बताते हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत वर्ष 2024-25 में आवास की स्वीकृति मिली। उन्होंने कुएँ के पानी का उपयोग कर घर पर ही लगभग 35 हजार ईंटों का निर्माण किया। इनमें से 17 हजार ईंटें बेचकर करीब 40 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित की जबकि शेष ईंटों का उपयोग वे अपने प्रधानमंत्री आवास निर्माण में कर रहे हैं। इस प्रकार उनका पक्का घर अब साकार रूप ले रहा है।
आत्मनिर्भरता की मिसाल- आज श्री सोमड़ू ऑडी एक आत्मनिर्भर किसान बन चुके हैं। मनरेगा से निर्मित कुआँ न केवल उनकी खेती और आय का आधार बना, बल्कि इससे उनके परिवार का जीवन स्तर भी बेहतर हुआ। यह सफलता की कहानी स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन हो तो वे ग्रामीण जीवन में स्थायी परिवर्तन, सम्मानजनक आजीविका और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकती हैं।

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