छत्तीसगढ़

पराली जलाने के दुष्परिणामो से किसानों को किया जा रहा जागरूक

बलौदाबाजार, 29 दिसम्बर 2025/sns/-जिले में धान फसल की कटाई पूरी हो चुकी है। जिसके पराली (पैरा) को कृषकों के द्वारा कटाई उपरान्त खेतों में जला दिया जाता है, जिससे उठने वाला धुंआ वायु प्रदुषण बढ़ता है, जिससे श्वसन रोग, आंखों में जलन, त्वचा संबंधित समस्याएं सहित कई स्वास्थ्यगत जोखिम उत्पन्न होते हैं। पराली जलाने से मृदा उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, इससे मिट्टी में उपलब्ध सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते है, एवं मिट्टी कठोर हो जाती है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को पराली नहीं जलाने को लेकर जागरूक किया जा रहा है.

कलेक्टर दीपक सोनी ने धान कटाई उपरांत पैरा को कृषि यंत्रो के माध्यम से उचित प्रबंधन हेतु किसानों से अपील किया है। कृषि रबी फसल के बुआई हेतु हैप्पी सीडर का उपयोग पराली को बिना जलाए गेहूं जैसी अगली फसल की सीधी बुवाई करने के लिए किया जाता है। यह मशीन पराली को काटकर खेत में बिखेर देती है, जिससे मिट्टी की नमी बनी रहती है तथा खरपतवार भी कम होता है। इसी प्रकार बेलर मशीन का उपयोग धान कटाई उपरान्त बचे हुए पैरा को गोल या चौकोर बंडल बनाने में किया जाता है, जिससे पैरा बिना मजदूरों के कम खर्चे में इकठ्ठा किया जा सकता है, जिसका उपयोग पशु चारे के रूप में किया जा सकता है। जिससे वायु प्रदुषण और मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान नहीं होता है। पैरा से खाद (कम्पोस्ट) बनाने हेतु कृषि विभाग के द्वारा बायो-डी कम्पोजर का वितरण कृषकों को मैदानी अधिकारियों के माध्यम से किया गया है। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के द्वारा वेस्ट डी कम्पोजर के माध्यम से पैरा से खाद बनाने की विधि का जीवंत प्रदर्शन किसानों के मध्य किया जा रहा है, बायो डी-कम्पोजर के उपयोग से किसान भाई पैरा को बहुत ही आसानी से कम्पोस्ट खाद में परिवर्तित कर सकते हैं, जिसका उपयोग रबी फसलों में किया जा सकता है। जिससे मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि होती है। पराली जलाने से रोकने हेतु जिला प्रशासन के द्वारा प्रत्येक ग्राम में पटवारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, सचिव एवं कोटवार का दल गठन किया गया है। जिसके द्वारा सतत् निगरानी किया जावेगा। दल के द्वारा खेतों का निरीक्षण कर फसल अवशेष के उचित प्रबंधन (यथा पशुचारे के रूप में उपयोग करने, कम्पोस्ट खाद बनाने आदि) के संबंध में कृषकों उचित सलाह दिया जावेगा। पराली (पैरा) जलाने से रोकने हेतु सभी ग्रामों में कोटवार के माध्यम से मुनादी करायी गई है, सभी सहकारी समितियों में पराली जलाने से नुकसान एवं खाद बनाने की विधि का फ्लैक्स के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

उप संचालक कृषि दीपक कुमार नायक के द्वारा किसान भाईयों से अपील किया कि फसल कटाई उपरान्त पैरा को न जलावें उसका उपयोग पशुचारे अथवा कम्पोस्ट खाद बनाने में करें जिससे वायु प्रदुषण न हो तथा मृदा उर्वरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत् पराली जलाने पर दण्डात्मक कार्यवाही का प्रावधान किया गया है।

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