छत्तीसगढ़

सेवा और समर्पण के लिए बीसी सखी श्रीमती जमुना बघेल राज्य स्तर पर हुई सम्मानित

जगदलपुर, 24 नवम्बर 2025/sns/- राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन संचालक श्री अश्विनी देवांगन ने सोमवार को तोकापाल विकासखंड के ग्राम पोटानार की बीसी (बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट) सखी श्रीमती जमुना बघेल को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं और अथक समर्पण के लिए रायपुर में सम्मानित किया। श्रीमती बघेल देउरगांव, पोटानार और रान सरगीपाल तीन ग्राम पंचायतों में अपनी सेवाएं प्रदान कर रही हैं और इन क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन की सच्ची रीढ़ बन चुकी हैं। उन्हें पिछले पाँच माह में सबसे अधिक बैंकिंग लेनदेन करने के लिए यह सम्मान मिला है। उन्होंने इस अवधि में 16 लाख 58 हजार 928 रुपए का लेनदेन किया है।श्रीमती बघेल की सेवाएं केवल पारंपरिक बैंकिंग तक ही सीमित नहीं हैंय वह ग्रामीणों के लिए एक चलता-फिरता बैंक हैं। वह पैसा निकासी, जमा करने और नए खाते खोलने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के अतिरिक्त पैन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, और श्रम कार्ड जैसी सरकारी योजनाओं से संबंधित दस्तावेजों को बनवाने में भी सक्रिय रूप से मदद करती हैं, जिससे ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके। बिलों के भुगतान को सरल बनाते हुए वह बिजली बिल, मोबाइल रिचार्ज, टीव्ही रिचार्ज, और मनी ट्रांसफर की सेवाएं भी प्रदान करती हैं। श्रीमती बघेल के कार्य का सबसे सराहनीय पहलू उनका मानवीय दृष्टिकोण है, जिसके तहत वह अपनी सेवाएं देने के लिए घर-घर जाती हैं, खासकर उन बीमार व्यक्तियों और बड़े बुजुर्गों के लिए जो चल-फिर नहीं सकते हैं। उनके इस समर्पण की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब कोरोना महामारी के चुनौतीपूर्ण दौर में भी उन्होंने अपनी सेवाएं कभी बंद नहीं कीं, यह दर्शाता है कि वह ग्रामीण समुदाय की सेवा के लिए कितनी प्रतिबद्ध हैं। मिशन संचालक द्वारा दिया गया यह सम्मान श्रीमती जमुना बघेल के अथक परिश्रम और सेवाभाव की एक उचित पहचान है।
जमुना ने बताया कि वह 2017 से बिहान समूह से जुड़ी है उन्होंने बीसी सखी के तौर पर काम करने के अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि वह 2022 से यह कार्य कर रही है। पहले जमुना की आर्थिक स्थिति खस्ताहाल थी। वहीं बीसी सखी के तौर पर काम करते हुए औसतन 10 से 15 हजार रूपए कमीशन के तौर पर प्राप्त होता है। जब वह समूह से नहीं जुड़ी थी तब वह घरेलु कार्य करती थी और खेती-बाड़ी देखती थी। बीसी सखी के तौर पर कार्य करने से लोग उसे जानने लगे और मान-सम्मान भी मिलने लगा। ग्राहकों के प्रति जमुना के आत्मीय व्यवहार ने भी जमुना के कार्य में सहायता प्रदान की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *