छत्तीसगढ़

मनरेगा से बना निजी तालाब बना आजीविका का मजबूत सहारा


बीजापुर, 22 नवंबर 2025/sns/ – बीजापुर जिले के जनपद पंचायत भोपालपटनम के ग्राम पंचायत बारेगुड़ा की निवासी श्रीमती पेंदम सम्मूबाई के जीवन में मनरेगा योजना ने एक नया उजाला भर दिया। पहले सम्मूबाई अपने परिवार के साथ केवल वर्षा आधारित खेती और मजदूरी पर निर्भर थीं। कृषि योग्य भूमि होते हुए भी सिंचाई सुविधा के अभाव में वे अपनी जमीन से पर्याप्त उत्पादन नहीं ले पाती थींए जिससे परिवार की आय सीमित रह जाती थी।

मनरेगा से मिली नई दिशा- एक दिन खेत में काम करते समय ग्राम रोजगार सहायक फागे वेंकटेश्वर द्वारा उन्हें जानकारी मिली कि महात्मा गांधी नरेगा योजना छोटे किसानों की निजी भूमि पर तालाब निर्माण की सुविधा प्रदान करती है। यह बात जानकर सम्मूबाई ने तुरंत ग्राम पंचायत में आवेदन किया। वर्ष 2023-24 में 2 लाख 25 हजार रुपये की लागत से उनके खेत में निजी तालाब निर्माण स्वीकृत हुआ और कार्य तेजी से शुरू हो गया। तालाब निर्माण से न केवल उनके परिवार बल्कि आसपास के मनरेगा मजदूरों को भी रोजगार मिला।

तालाब बना आय का आधार- तालाब बनने के बाद सम्मूबाई ने इसमें 1 किलो 500 ग्राम मछली बीज डाला। परिणामस्वरूप वर्ष 2024-25 में उन्हें मछली पालन से लगभग 40 हजार रुपये की आमदनी हुई। इसके साथ ही तालाब के समीप स्थित 2 एकड़ भूमि में सिंचाई सुविधा मिलने से धान की उपज बढ़ी और उन्हें 50 क्विंटल धान से 1 लाख 25 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई।

सशक्त हुई आजीविका- मनरेगा से बने इस निजी तालाब ने सम्मूबाई के जीवन में स्थायी परिवर्तन लाया। अब उनका परिवार वर्षभर रोजगार और आय के सुरक्षित साधनों से जुड़ चुका है। खेती और मछली पालन दोनों से उन्हें दोगुना लाभ मिला है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।

उम्मीद का नया रास्ता- श्रीमती पेंदम सम्मूबाई की कहानी इस बात का प्रमाण है कि महात्मा गांधी नरेगा योजना छोटे और जरूरतमंद किसानों के लिए आजीविका का एक प्रभावी माध्यम बन रही है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और संसाधनों की उपलब्धता ने न केवल उनकी आय बढ़ाई बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर भी बनाया है। यह सफलता कहानी अन्य किसानों को भी प्रेरित करती है कि वे सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपनी आजीविका को सशक्त और सुरक्षित बना सकते हैं।

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