छत्तीसगढ़

पीएम-किसान सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त जारी

बलौदाबाजार, 20 नवम्बर 2025/sns/- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पीएम-किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त का हस्तांतरण कार्यक्रम बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र, भाटापारा में बुधवार को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त के राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम का सीधा प्रसारण एवं रबी फसलों पर प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश के 9 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में कुल 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सम्मान राशि का हस्तांतरण किया। केंद्र सरकार की इस ऐतिहासिक पहल के अंतर्गत बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के 127367 किसानों को कुल 25.47 करोड़ रुपये की सम्मान राशि सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त हुई।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश के अन्नदाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि “किसान देश की समृद्धि की रीढ़ हैं। सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। पीएम किसान सम्मान निधि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि किसानों के परिश्रम का सम्मान है। सरकार छोटे से छोटे किसान को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आगे कहा कि प्राकृतिक खेती, ड्रोन तकनीक, मिलेट्स, एफपीओ, जल संरक्षण एवं डिजिटल कृषि की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है, जिससे किसानों का खर्च कम हो और उत्पादन तथा आय दोनों में वृद्धि हो।

डॉ. पी. डी. वर्मा ने रबी फसलों हेतु सीड ड्रिल, जीरो टिल सीडर, मल्चर, लेजर लेवलर, पावर वीडर, स्प्रेयर, ड्रोन स्प्रे तकनीक आदि यंत्रों के उपयोग एवं उनके लाभों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि कृषि यंत्रीकरण से फसल लागत लगभग 20-30 प्रतिशत कम होती है और समय की बचत भी होती है। उन्होंने किसानों को कृषि यंत्रों पर मिलने वाली अनुदान योजनाओं की भी जानकारी दी। डॉ. स्वाति मिर्झा ने गेहूं, चना, मसूर तथा सरसों की उन्नत किस्में, बीज उपचार, कतार बुवाई, सिंचाई प्रबंधन, पालीथीन मल्चिंग, अंतःफसली खेती, माइक्रो-न्यूट्रिएंट स्प्रे, तथा कीटरोग रोकथाम उपायों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया। उन्होंने जल संरक्षण तकनीकों, ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई के लाभ तथा फसल विविधीकरण पर भी बल दिया।

डॉ. दीपमाला लकरा ने चना में हेलिकोवर्पा, सरसों में माहू, गेहूं में दीमक, जूं एवं फफूंदजनित रोगों के समेकित प्रबंधन (आईपीएम) की जानकारी दी। उन्होंने पीला चिपचिपा ट्रैप, ट्राइकोग्रामा, एनपीवी, बायोपेस्टीसाइड्स, फंगीसायड्स के सही उपयोग एवं मात्रा पर किसानों को प्रशिक्षित किया।

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