छत्तीसगढ़

जिले में उद्यानिकी प्रगति परंपरा से आधुनिकता की ओर


बिलासपुर, 12 नवंबर 2025/sns/-छत्तीसगढ़ राज्य के गठन को पच्चीस वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। यह रजत जयंती वर्ष राज्य की विकास यात्रा का प्रतीक है। वह यात्रा जिसमें परंपरा और तकनीकी नवाचार मिलकर कृषि को आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर कर रहे हैं। बिलासपुर जिला इस प्रगति का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है, जहाँ किसानों ने परंपरागत खेती के अनुभवों को आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़ते हुए उद्यानिकी क्षेत्र में नई पहचान बनाई है।
परंपरा से तकनीक तक: एक नई दिशा
कभी पारंपरिक खेती तक सीमित रहने वाला यह क्षेत्र आज स्मार्ट कृषि की ओर बढ़ चुका है। यहाँ के किसान अब ड्रोन आधारित फसल निरीक्षण, सेंसर युक्त सिंचाई प्रणाली और डाटा विश्लेषण आधारित निर्णय जैसे आधुनिक उपायों का प्रयोग कर रहे हैं। इससे न केवल फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता में वृद्धि हुई है, बल्कि लागत में कमी और पर्यावरणीय संतुलन भी सुनिश्चित हुआ है। राज्य सरकार द्वारा बागवानी फसलों के विविधिकरण और संरक्षित खेती को बढ़ावा देने से किसानों के लिए लाभकारी कृषि के नए अवसर सृजित हुए हैं।
कृषि छत्तीसगढ़ की रीढ़ है। राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में कृषि का योगदान लगभग 25 प्रतिशत है, जबकि 80 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि और उससे जुड़े उद्योगों पर निर्भर है। ऐसे में कृषि और बागवानी क्षेत्र का सुदृढ़ीकरण राज्य की आर्थिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य गठन के समय बिलासपुर जिले में उद्यानिकी फसलों का कुल रकबा 13,242 हेक्टेयर तथा उत्पादन 1,10,608 मीट्रिक टन था। वर्तमान में यह बढ़कर 57,595 हेक्टेयर क्षेत्रफल और 4,38,448 मीट्रिक टन उत्पादन तक पहुँच गया है कृ यह केवल आंकड़ों की वृद्धि नहीं, बल्कि जिले की कृषि जागरूकता और तकनीकी प्रगति का प्रमाण है

योजनाओं के माध्यम से सशक्त होता किसान –
राज्य गठन के प्रारंभिक समय में जहाँ केवल तीन उद्यानिकी योजनाएँ संचालित थीं, वहीं आज बिलासपुर जिले में आठ प्रमुख योजनाओं के माध्यम से किसानों को लाभ प्रदान किया जा रहा है – 1. राज्य पोषित उद्यानिकी योजना 2. राष्ट्रीय बागवानी मिशन 3. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना 4. सब मिशन ऑन एग्रोफॉरेस्ट्र 5. ऑयल पाम योजना 6. पुनर्गठित बांस मिशन 7. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 8. फसल बीमा योजना
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत 589 हेक्टेयर क्षेत्र में टपक सिंचाई प्रणाली स्थापित की गई है, जिससे जल का संरक्षण और फसल उत्पादन दोनों में वृद्धि हुई है।

संरक्षित खेती: आधुनिक उद्यानिकी की दिशा में कदम
संरक्षित खेती के क्षेत्र में बिलासपुर जिलासी प्रदेश में अग्रणी है-शेडनेट हाउस 2 लाख वर्गमीटर, नेचुरल वेंटिलेटेड पॉली हाउस 40 हजार वर्गमीटर एवं मल्चिंग खेती 4 हजार 300 हेक्टेयर क्षेत्र में की जा रही है। इन माध्यमों से उच्च गुणवत्ता की सब्ज़ी एवं फूलों की खेती की जा रही है,का जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विकासखंड बिल्हा स्थित शासकीय उद्यान रोपणी, सरकंडा में स्थापित प्लग टाइप सीडलिंग यूनिट जिले की बड़ी उपलब्धि है। यहाँ अब तक 1 करोड़ 16 लाख 45 हजार से अधिक रोगमुक्त सब्ज़ी पौध तैयार कर किसानों को वितरित की गई है। वर्तमान में ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की पौध उत्पादन तकनीक विशेष लोकप्रियता प्राप्त कर रही है।

किसानों के लिए सुरक्षा और नवाचार –
अब तक जिले के लगभग 52 हजार 200 कृषक विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभांवित हो चुके हैं। वर्ष 2016-17 से संचालित पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के अंतर्गत 1,261 कृषकों को 24.19 लाख रुपए का दावा भुगतान किया जा चुका एक्स है। जिले के कुछ नवोन्मेषी किसानों ने ड्रेगन फ्रूट, हाइब्रिड कटहल, जरबेरा, डच गुलाब और जरेनियम जैसी उच्च मूल्य की फसलों की खेती कर आधुनिक कृषि की दिशा में उदाहरण प्रस्तुत किया है। इसके अतिरिक्त खाद्य तेलों के आयात में कमी लाने हेतु नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल (ऑयल पाम) योजना के अंतर्गत जिले को 300 हेक्टेयर का भौतिक लक्ष्य प्राप्त हुआ है।
रजत जयंती वर्ष के अवसर पर बिलासपुर जिला उद्यानिकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नवाचार का प्रतीक बनकर उभरा है। यहाँ की कृषि परंपरा के साथ आधुनिक तकनीक का संतुलित समावेश, किसानों की मेहनत और शासन की योजनाओं का सफल समन्वय इन सबने जिले को हरित, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाया है।

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