बीजापुर, 30 सितम्बर 2025/sns/- यह कहानी है जनपद पंचायत उसूर के नियद नेल्लानार ग्राम पंचायत तर्रेम के आश्रित गांव चुटवाही की 50 वर्षीय महिला श्रीमती हुंगी की है। जिन्होंने अपने धैर्य और हौसले के बलबूते पर माओवाद के घने अंधेरे के साये में भी अपने सपने को जिंदा रखा। केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना में श्रीमती हुंगी का पक्के छत का आवास बनकर तैयार है। कई मायनों में यह आवास बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है -नक्सली दहशत को किनारा कर यह गांव का पहला प्रधानमंत्री आवास है। रूरल मेसन के माध्यम से श्रीमती हुंगी अपने आवास निर्माण में रानी मिस्त्री का प्रशिक्षण भी ले रही है।
ग्राम चुटवाही माओवाद से प्रभावित होने के कारण शासकीय योजनाओं का संचालन कठिन था। आजादी के 75 वर्ष बाद भी आंतक और भय के साये में ग्रामीण जीने को मजबूर थे। भय और आतंक के इस माहौल में ग्रामीण चाह कर भी पक्के आवास का निर्माण नहीं कर पा रहे थे। श्रीमती हुंगी अपने बच्चे को खेती-बाड़ी कर पालन-पोषण कर रही थी, मन में विश्वास था कि एक दिन यह परिस्थिति जरूर बदलेगी।
गांव में सुरक्षा कैंम्प लगने के साथ ही माओवाद का अंधियारा भी छटने लगा। वित्तीय वर्ष 2024-25 में ग्राम पंचायत के द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी मिली। शुरूआत में ग्रामीण आवास निर्माण कराने से डर रहे थे। श्रीमती हुंगी को समझ में नहीं रहा था कि आवास का निर्माण कैसे किया जाए तभी पंचायत से रूरल मेसन अंतर्गत रानी मिस्त्री प्रशिक्षण की जानकारी मिली। जो कि अपने ही आवास में काम के साथ एक हुनर सीखने का भी अवसर था।
श्रीमती हुंगी का कहना है कि माओवाद के डर के चलते आज तक हमारे गांव में एक भी पक्का आवास नही बना है, हमारा घर गांव में पहला पक्की छत वाला बनकर तैयार है। शासन प्रशासन की सहायता से यह सब संभव हो पाया। प्रधानमंत्री आवास योजना वास्तव में हम जैसे गरीब परिवारों के लिए वरदान है।

