धमतरी, 28 अगस्त 2025/sns/- श्रम विभाग में पजीकृत निर्माणी एवं असंगठित क्षेत्र के श्रनिकों के कल्याण हेतु विभिन्न योजनाएं संचालित हैं। इसके तहत पंजीकृत श्रमिकों के विशेषकर नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना और नोनी सशक्तिकरण सहायता योजनाएं चल रही हैं। श्रम पदाधिकारी ने बताया कि विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए ऑनलाईन आवेदन किया जाता है, अधिकतम ऑनलाईन आवेदन सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) के माध्यम से प्राप्त होते हैं।
इस सबंध में श्रमायुक्त सह श्रम सचिव के द्वारा जारी निर्देश के तहत कतिपय सीएससी संचालकों द्वारा श्रम विभाग के अधीन संचालित मंडलों में श्रमिकों के पंजीयन, योजना आवेदन विभागीय पोर्टल में करने हेतु विभाग द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूल की जा रही है। श्रम पदाधिकारी ने बताया कि ऑनलाईन पोर्टल में श्रमिक पंजीयन आवेदन हेतु 30 रूपये तथा योजना आवेदन हेतु 20 रुपये शुल्क निर्धारित है, जबकि कुछ सीएससी संचालकों के द्वारा पंजीयन, योजना आवेदन करने हेतु श्रमिकों से 1000-1500 रूपये तक लिया आ रहा है।
श्रमायुक्त द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सभी च्वाईस सेंटर संचालकों को श्रमिक पंजीयन, योजना हेतु निर्धारित शुल्क ही लिया जाए। उन्होंने यह भी कहा है कि अधिक शुल्क लेने पर जांच कर कानूनी कार्यवाही की जाएगी एवं मंडल स्तर पा समय-समय पर निगरानी की जाएगी। शिकायत मिलने पर संबंधित चॉईस सेंटर संचालक पर विधिवत कार्यवाही की आयेगी। जिला स्तर पर कलेक्टर के संज्ञान में प्रकरण लाया जाकर कठोर कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश भी श्रम पदाधिकारी को दिए गए हैं। यह भी कहा गया है कि ई-डिस्ट्रिक्ट मैनजर एवं चॉईस सेंटर संचालको के साथ नियमित बैठक आयोजित की जाएगी। पोर्टल पर दर्ज श्रमिक पंजीयन एवं आवेदन की स्वीकृति, निरस्तीकरण की जानकारी भी रेण्डम आधार पर जांची जाएगी। पंजीयन एवं योजना आवेदन की स्थिति से जुड़ी शिकायतों का त्वरित निकराकरण होगा। श्रमिकों, हितग्राहियों को श्रमेव जयते मोबाईल एप के माध्यम से जागरूक किया जायेगा। सभी श्रम कार्यालयों एवं श्रम संसाधनों से श्रनिकां को ऑनलाईन पंजीयन एवं आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। श्रमायुक्त ने साफ किया है कि श्रमिकों के हितों की रक्षा एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तय सीमा से अधिक शुल्क लेने वाले चॉईस सेंटर संचालकों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।

