छत्तीसगढ़

180 सिविल डिफेंस वालेंटियर्स को मिला आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण,  बेहतर प्रदर्शन करने वालों को मिलेगा प्रमाण पत्र

दुर्ग, 19 मार्च 2026/sns/- नगर सेना कार्यालय में केन्द्र शासन के निर्देशानुसार जिले में सिविल डिफेंस वालेंटियर्स को प्रशिक्षित किया गया।  कुल 360 वालेंटियर्स को प्रशिक्षित किया जाना है, जिसके अंतर्गत प्रथम बैच का सफलतापूर्वक संचालन किया गया। जिला सेनानी नगर सेना कार्यालय द्वारा नागरिक सुरक्षा, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएँ द्वारा 14 मार्च 2026 से 20 मार्च 2026 तक 180 सिविल डिफेंस वालेंटियर्स का प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को नागरिक सुरक्षा की जानकारी दी गई। साथ ही फायर फाइटिंग के अंतर्गत अग्निशमन यंत्रों का उपयोग कर आग बुझाने के तरीके सिखाए गए। फर्स्ट एड प्रशिक्षण में सीपीआर, पट्टियां बांधने जैसी जीवनरक्षक तकनीकों का अभ्यास कराया गया। इसके अलावा रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत आपात स्थिति में बचाव के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी गई। इस प्रथम बैच में कुल 180 वालेंटियर्स शामिल हुए, जिनमें 75 पुरुष और 105 महिलाएं थीं।
आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त कर व्यक्ति आपदा के समय स्वयं, अपने परिवार तथा समाज की सुरक्षा के साथ राष्ट्र की सेवा भी कर सकता है। उन्होंने प्रशिक्षण को अत्यंत आवश्यक बताते हुए सभी से गंभीरता और लगन के साथ इसे सीखने की अपील की। कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि आपदा और मुसीबत कभी भी अचानक आ सकती है, ऐसे समय में हर एक मिनट कीमती होता है। इसलिए प्रशिक्षण के दौरान दी जा रही जानकारी को ध्यानपूर्वक सुनें, समझें और उसे अपनी डायरी में नोट करते रहें। उन्होंने प्रतिभागियों को यह भी सलाह दी कि वे यहां सीखी गई बातों का नियमित अभ्यास करें और घर पर परिवार के सदस्यों के साथ भी प्रैक्टिस करें, ताकि जरूरत पड़ने पर सही तरीके से उसका उपयोग किया जा सके। उन्होंने आगे कहा कि जितना अधिक अभ्यास किया जाएगा, उतनी ही बेहतर तैयारी होगी और आपदा की स्थिति में प्रभावी ढंग से कार्य किया जा सकेगा। कलेक्टर ने कहा कि प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को आगामी 15 अगस्त के अवसर पर प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य आपदा के समय प्रशिक्षित वालेंटियर्स के माध्यम से त्वरित और प्रभावी सहायता सुनिश्चित करना है, जिससे जन-धन की हानि को कम किया जा सके।
 

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