रायगढ़, 19 मार्च 2026/sns/- विकासखंड धरमजयगढ़ के ग्राम पंचायत चुहकीमार के आश्रित ग्राम औरानारा की रहने वाली दिलमोती अगरिया आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने हुनर और मेहनत के दम पर न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि आजीविका का स्थायी साधन भी खड़ा किया।
दिलमोती अगरिया “एकता समूह” से जुड़ी हुई हैं, जो महामाया संकुल संगठन कुड़ेकेला के अंतर्गत कार्यरत है। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बैंक लिंकेज के माध्यम से 20 हजार रुपए की आर्थिक सहायता मिली। इस राशि का उपयोग करते हुए उन्होंने लोहे का सामान एवं पंखा खरीदा और अपने पारंपरिक कौशल को आजीविका का माध्यम बनाया। आज दिलमोती लोहे से हंसिया, कुल्हाड़ी, तवा, फावड़ा सहित अन्य उपयोगी घरेलू और कृषि उपकरण तैयार कर रही हैं। उनके द्वारा बनाए गए उत्पाद स्थानीय बाजार में पसंद किए जा रहे हैं, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है, जो उनके परिवार के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन चुकी है।
इस सफलता के पीछे सक्रिय महिला संतोषी अगरिया का भी विशेष योगदान है, जिन्होंने दिलमोती को मार्गदर्शन और प्रेरणा दी। समूह की सामूहिक शक्ति और सहयोग से दिलमोती ने यह साबित कर दिया कि सही दिशा और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं। दिलमोती अगरिया की यह यात्रा न केवल उनके व्यक्तिगत सशक्तिकरण की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि शासन की योजनाएं और महिला समूह मिलकर किस प्रकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकते हैं।

