छत्तीसगढ़

सुकमा में खुरहा-चपका टीकाकरण महा अभियान शुरू

सुकमा, 12 मार्च 2026/sns/-जिले में पशुधन को खुरहा-चपका जैसी गंभीर संक्रामक बीमारी से बचाने के लिए जिला प्रशासन एवं पशुधन विकास विभाग सुकमा द्वारा खुरहा-चपका टीकाकरण महा अभियान चलाया जा रहा है। यह सघन टीकाकरण अभियान 15 मार्च 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक जिले भर में संचालित किया जाएगा।
कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन और उपसंचालक पशुचिकित्सा सेवाएं के सहयोग से चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य किसानों और पशुपालकों के पशुओं को खतरनाक संक्रमण से सुरक्षित रखना है। प्रशासन ने सभी पशुपालक भाइयों से अपील की है कि वे अपने पशुओं को समय पर टीकाकरण कराकर इस बीमारी से बचाव सुनिश्चित करें।
क्या है खुरहा-चपका रोग
खुरहा-चपका एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है, जो सूक्ष्म विषाणु के संक्रमण से फैलती है। यह रोग मुख्य रूप से गाय, भैंस, भेड़, बकरी, सूकर तथा अन्य चौपाया एवं जंगली पशुओं में पाया जाता है। समय पर टीकाकरण नहीं होने की स्थिति में यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है और पशुओं की मृत्यु तक हो सकती है।
संक्रमण कैसे फैलता है
पशुचिकित्सा विभाग के अनुसार संक्रमित पशुओं के संपर्क में आने से यह बीमारी तेजी से फैलती है। संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग नहीं रखना, दूध दुहने या पशुओं की देखभाल करने वाले व्यक्तियों द्वारा स्वच्छता का ध्यान नहीं रखना, पशुओं के लार या खुर के घाव से संक्रमण फैलना तथा पशुशालाओं की नियमित सफाई नहीं करना इसके प्रमुख कारण हैं।
रोग के प्रमुख लक्षण
खुरहा-चपका से संक्रमित पशुओं में मुंह से चिपचिपा लार निकलना, तेज बुखार, पशुओं का लंगड़ाना, ठीक से चल नहीं पाना, खुरों और मुंह में छोटे-छोटे फफोले आना तथा उनके फटने से घाव बन जाना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसके अलावा गर्भवती पशुओं में गर्भपात तथा दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन में कमी भी देखी जाती है।
संक्रमण की स्थिति में क्या करें
यदि किसी पशु में इस बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय को सूचना दें। संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें और प्राथमिक उपचार के रूप में पशु के खुरों को गर्म पानी से साफ करें तथा मुंह और जीभ पर बोरोग्लिसरीन का लेप करें। इसके साथ ही पशुचिकित्सक से उचित उपचार और सलाह अवश्य लें।
उपसंचालक पशुचिकित्सा सेवाएं सुकमा डॉ. संदीप इंदुरकर ने सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने पशुओं का समय-समय पर टीकाकरण कराएं तथा किसी भी प्रकार की समस्या होने पर नजदीकी पशुचिकित्सालय से संपर्क करें।

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