छत्तीसगढ़

वन अधिकारों की मान्यता में महिलाओं की भागीदारी पर जोरपति-पत्नी के संयुक्त नाम से जारी होंगे अधिकार पत्र

जगदलपुर, 25 फरवरी 2026/sns/- राज्य शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने जिले में वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए है। शासन द्वारा 23 फरवरी को जारी इस महत्वपूर्ण पत्र के अनुसार अब अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के तहत महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को हर स्तर पर अनिवार्य कर दिया गया है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय से प्राप्त निर्देशों के अनुपालन में यह स्पष्ट किया गया है कि वन अधिकार अधिनियम और इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों की प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में महिलाओं की सहभागिता आवश्यक है, जिसमें ग्राम सभा से लेकर वन अधिकार समितियां, अनुविभागीय स्तरीय समितियां और जिला स्तरीय समितियां तक शामिल हैं।  
इस नई व्यवस्था के तहत अब वन अधिकार पत्र या पुस्तिका मान्य करते समय अधिनियम की धारा 4(4) के प्रावधानों का कड़ाई से पालन किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि संबंधित पट्टों में पति और पत्नी दोनों का नाम और प्रतिनिधित्व दर्ज हो। इसके अतिरिक्त वन अधिकार नियमों के अनुसार ग्राम सभा की कुल सदस्यता में कम से कम एक-तिहाई महिलाएं होना अनिवार्य है, ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनका प्रभाव बना रहे। यह भी निर्देशित किया गया है कि वे व्यक्तिगत वन अधिकार दावों के संबंध में जेंडर-सेग्रिगेटेड महिला-पुरुष आधारित अलग-अलग डेटा संधारित करें। चूंकि इस पूरे मामले की समीक्षा राज्य शासन द्वारा की जा रही है, कलेक्टर ने सभी संबंधित विभागों को प्राथमिकता के आधार पर कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों पर की गई प्रगति की जानकारी 15 मार्च तक शासन को प्रेषित करनी होगी, ताकि जमीनी स्तर पर महिलाओं के वन अधिकारों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *