छत्तीसगढ़

लखपति दीदी संवादः बीजापुर की सुनीता पसपुल ने बढ़ाया जिले का मान, मुख्यमंत्री जी के न्योता भोज में हुई शामिल

बीजापुर, 09 मार्च 2026/sns/-अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रायपुर के इंडोर स्टेडियम में लखपति दीदी संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने प्रदेश के लखपति दीदियों से संवाद कर उनकी सफलता की कहानी भी सुनी। इस कार्यक्रम में जिला बीजापुर के नियद नेल्लानार क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चेरपाल की श्रीमती सुनीता पसपुल को भी संवाद करने का अवसर प्राप्त हुआ। श्रीमती सुनीता पसपुल को माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के साथ रात्रि भोज में शामिल होने का अवसर प्राप्त हुआ। इस अवसर पर उन्होंने अपनी सफलता की कहानी और स्वावलंबन की यात्रा साझा की।
जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नम्रता चौबे ने जिले की समस्त महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकानाएं देते हुए कहा कि जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत महिलाओं को आजीविका मूलक गतिविधियों से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने प्रयास किए जा रहे हैं। नियद नेल्लानार क्षेत्र में सीमित संसाधनों और पर्याप्त अवसर नहीं मिलने के बावजूद श्रीमती सुनीता पसपुल के लखपति दीदी बनने का सफर क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है। लखपति दीदी श्रीमती सुनीता पसपुल का राज्य स्तर पर जिले का प्रतिनिधित्व करना गर्व की बात है। मैं चाहूंगी कि उनकी उपलब्धि से प्रेरणा लेते हुए क्षेत्र की अन्य महिलाएं भी आत्मनिर्भर बने।  
नियद नेल्लानार क्षेत्र से लखपति दीदी बनने की कहानी- जिला बीजापुर की नियद नेल्लानार क्षेत्र स्थित ग्राम चेरपाल की रहने वाली सुनीता दीदी के घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। उन्होंने स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद बचत एवं ऋण के माध्यम से उन्नत बीज, जैविक खाद और नई खेती तकनीकों का उपयोग शुरू किया जिससे उत्पादन बढ़ा और फसल एवं सब्जी से अच्छी आय 52000 से 55000 रूपये होने लगी। इसके बाद उन्होंने किराना दुकान को व्यवसाय के रूप में शुरू किया। इससे इन्हें रूप से आमदनी मिलने लगी। साथ-साथ उन्होंने गांव में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का लाभ उठाते हुए महुआ एवं टोरा, अन्य का क्रय विक्रय भी शुरू किया। वे ग्रामीणों से महुआ एवं टोरा, अन्य खरीदकर उसे साफ-सफाई सही तरीके से संग्रहित कर बाजार में अच्छे दाम पर बेचने लगीं। इससे उन्हें अतिरिक्त लाभ वार्षिक 15000-20000 रूपये मिलने लगा। तीनों कार्यों से उनकी आय लगातार बढ़ती गई। सही योजना और समूह के सहयोग से सुशीला दीदी की सलाना आय 115000 रुपये से 120000 रूपये से अधिक हो गई है।
आज सुनीता दीदी के केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर चुकी है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

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