बीजापुर, 07 मार्च 2026/sns/-बीजापुर से लगभग 20 किलोमीटर दूर नियद नेल्लानार क्षेत्र के ग्राम पालनार में रहने वाली श्रीमती बधरी ताती अपने परिवार के साथ निवास करती हैं। कभी उनका जीवन केवल घर के कामकाज और खेती तक ही सीमित था। परिवार की आय के लिए वे पूरी तरह अन्य सदस्यों पर निर्भर रहती थीं। बढ़ते खर्च और सीमित आय के कारण परिवार का भरण-पोषण करना उनके लिए कठिन होता जा रहा था।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण पालनार गांव तक पहुंचना भी आसान नहीं था। यही कारण था कि लंबे समय तक उन्हें शासकीय योजनाओं की सही जानकारी नहीं मिल पाती थी और कृषि व वनोपज से मिलने वाली उपज का उचित मूल्य भी उन्हें नहीं मिल पाता था।
स्थिति में बदलाव तब आया, जब उनका क्षेत्र नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत चयनित हुआ और गांव में कैंप लगे। कैम्प लगने से ग्रामीणों तक शासकीय योजनाओं की जानकारी पहुंचने लगी। इसी दौरान छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के तहत महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया। मोहल्ले की 10 महिलाओं ने मिलकर पूजा स्व सहायता समूह बनाया, जिसमें बधरी ताती भी सदस्य बनीं।
समूह से जुड़ने के बाद बधरी दीदी को चक्रिय निधि के रूप में 1500 रुपये तथा बैंक लिंकेज के माध्यम से 3000 रुपये का मुद्रा ऋण मिला। और 5000 रूपये मुद्रा लोन इस राशि से उन्होंने अपने घर में एक छोटा किराना स्टोर शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपने काम का विस्तार किया और आज वे कई आय स्रोतों से अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। वर्तमान में बधरी दीदी को निजी कृषि और सब्जी उत्पादन से लगभग 6,200 रुपये, बकरी एवं मुर्गी पालन से करीब 20000 रुपये, वनोपज जैसे तेंदूपत्ता, महुआ, टोरा आदि से लगभग 30,000 रुपये तथा किराना दुकान से करीब 16000 रुपये की आय प्राप्त हुई।
प्रशासन और स्वयं सहायता समूह की मदद से बधरी दीदी अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सफल हुई हैं। आज उनका परिवार बेहतर जीवन-यापन कर रहा है और वे लखपति दीदी के रूप में अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
बधरी दीदी कहती हैं, समूह से जुड़ने के बाद मेरे जीवन को नई दिशा मिली है। अब मैं केवल अपने घर की देखभाल ही नहीं करती, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हूं। समूह ने मुझे आर्थिक सहयोग के साथ-साथ आत्मविश्वास भी दिया है।

