छत्तीसगढ़

जल संचयन में जनभागीदारी से भूजल संवर्धन को गति

मुंगेली, 22 फरवरी 2026/sns/- जल संरक्षण और भूजल संवर्धन को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से केंद्रीय जल शक्ति मंत्री एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में संचालित जल संरक्षण गतिविधियों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में जल संचयन के लिए संसाधनों के समन्वय पर बल देते हुए ग्राउंड वाटर रिचार्जिंग को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए। भूजल संवर्धन हेतु गैब्रियन स्ट्रक्चर, सोखता गड्ढा, चेक डैम, तालाब गहरीकरण एवं रेनवाटर हार्वेस्टिंग जैसी गतिविधियों को व्यापक स्तर पर संचालित करने पर जोर दिया गया। नगरीय क्षेत्रों में रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं को प्रोत्साहित करने तथा वॉटर लॉस को न्यूनतम करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने जल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “जल है तो जीवन है।” उन्होंने कहा कि आज जल संकट केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक चुनौती भी बन चुका है। प्रदेश में जल संचयन के क्षेत्र में बेहतर कार्य हो रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध और परिणामोन्मुखी कार्य करने के निर्देश दिए। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि सरकारी योजनाओं और जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जल संरक्षण कार्यों के लिए बजट की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता है सुदृढ़ कार्ययोजना बनाकर समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने की। बैठक में जीआईएस मैपिंग के माध्यम से जल स्रोतों की पहचान और वैज्ञानिक प्रबंधन पर भी चर्चा की गई।
इस दौरान कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार ने जिला कलेक्टोरेट स्थित एनआईसी कक्ष में जिले में जल संरक्षण की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। पीएचई विभाग को जल संकट की स्थिति निर्मित होने से पूर्व आवश्यक स्थानों पर टंकियां स्थापित करने के निर्देश दिए गए। पंचायत विभाग को शौचालय मॉनिटरिंग एवं जल संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया। बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया गया, कि जल संकट से जल संतृप्ति की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए आम नागरिकों को भी जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए, ताकि जिले में सतत जल प्रबंधन की दिशा में मजबूत आधार तैयार हो सके। बैठक में अतिरिक्त कलेक्टर श्रीमती निष्ठा पाण्डेय तिवारी सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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